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Supreme Court: सरकार BS-IV से पुराने वाहनों पर कर सकती है कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किया बदलाव

Wed, 17 Dec 2025 08:10 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 17 Dec 2025 08:10 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार को ऐसे पुराने वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है, जो BS-IV उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में दिए गए अपने पहले के आदेश में संशोधन किया है।

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SC allows Delhi govt to act against old vehicles which are not BS-IV compliant Latest News in Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने वाहन उत्सर्जन को लेकर एक अहम आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार को यह अनुमति दे दी कि वह ऐसे पुराने वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है, जो भारत स्टेज-IV (BS-IV) उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते। यह फैसला राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए लिया गया है और इससे वाहन उत्सर्जन पर नियंत्रण की कोशिशों को बल मिलने की उम्मीद है।
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SC allows Delhi govt to act against old vehicles which are not BS-IV compliant Latest News in Hindi
Delhi Pollution - फोटो : अमर उजाला
अगस्त के आदेश में संशोधन, दायरा हुआ स्पष्ट
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 12 अगस्त को दिए गए अपने पुराने आदेश में संशोधन किया है। उस आदेश में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी। अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत केवल उन्हीं वाहनों को मिलेगी, जो BS-IV या उससे ऊंचे मानकों पर खरे उतरते हैं। 

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एमसी मेहता मामले में जारी हुईं नई दिशानिर्देश
यह आदेश लंबे समय से चल रहे एमसी मेहता वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया गया। अदालत ने कहा कि अगस्त का आदेश वाहनों की उम्र के आधार पर कार्रवाई रोकने के लिए था, न कि उत्सर्जन मानकों की अनदेखी के लिए। ऐसे में अब BS-IV से नीचे के मानकों, यानी BS-III और उससे पुराने वाहनों पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।

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SC allows Delhi govt to act against old vehicles which are not BS-IV compliant Latest News in Hindi
Delhi Pollution - फोटो : ANI
बीएस-IV और नए वाहनों को राहत बरकरार
पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि BS-IV और उससे नए मानकों वाले वाहनों के मालिकों के खिलाफ केवल उम्र के आधार पर कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। यानी डीजल वाहन अगर 10 साल से पुराने हैं या पेट्रोल वाहन 15 साल से पुराने हैं, लेकिन वे BS-IV मानकों का पालन करते हैं, तो उन्हें फिलहाल राहत मिलेगी। 

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सरकार की दलील, पुराने वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत से आग्रह किया था कि BS-III और उससे पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी जाए। उन्होंने दलील दी कि पुराने वाहनों की उत्सर्जन क्षमता बेहद खराब होती है और वे प्रदूषण में असमान रूप से बड़ा योगदान देते हैं। इस दलील का समर्थन अमीकस क्यूरी के रूप में अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने भी किया।

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Delhi Pollution - फोटो : ANI
बीएस मानकों की पृष्ठभूमि और पुराने आदेश
अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि BS-IV मानक 2010 में लागू किए गए थे और उससे पहले बने वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली श्रेणी में आते हैं। इससे पहले, 12 अगस्त को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों के मालिकों को राहत दी थी और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए थे। 

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एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देश
यह मामला 29 अक्तूबर 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भी जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश को बरकरार रखा गया था। एनजीटी ने 26 नवंबर 2014 को आदेश दिया था कि 15 साल से पुराने सभी डीजल और पेट्रोल वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति न दी जाए और उल्लंघन पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन जब्त किए जाएं। यह आदेश दोपहिया से लेकर भारी वाहनों तक, सभी पर लागू था।

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Delhi Air Pollution - फोटो : ANI
दिल्ली सरकार की आपत्ति और नई मांग
दिल्ली सरकार ने उम्र के आधार पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सरकार ने दलील दी थी कि कई लोग मजबूरी में अपने पुराने वाहन बेचने को विवश हो जाते हैं, जबकि उनका उपयोग बेहद सीमित होता है। सरकार ने यह भी मांग की थी कि केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा उम्र आधारित प्रतिबंधों और उत्सर्जन आधारित मानकों के वास्तविक पर्यावरणीय लाभों का विस्तृत अध्ययन कराया जाए।

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