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पश्चिम एशिया संकट: 300 करोड़ रुपये की लग्जरी कारें चेन्नई पोर्ट पर फंसी, शिपिंग बाधित, क्या है वजह
Wed, 15 Apr 2026 07:27 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Wed, 15 Apr 2026 07:27 PM IST
सार
मेक्सिको से खाड़ी देशों के बाजारों में निर्यात की जा रही 300 करोड़ रुपये से अधिक की 600 से ज्यादा प्रीमियम कारें चेन्नई बंदरगाह पर ही फंसी हुई हैं। क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण शिपिंग मार्ग बाधित हो गए हैं।
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बंदरगाह
- फोटो : एएनआई
विस्तार
मेक्सिको से खाड़ी (गल्फ) देशों के लिए भेजी जा रही 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 600 से ज्यादा प्रीमियम कारें चेन्नई पोर्ट पर अटकी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण शिपिंग रूट बाधित हो गए हैं, जिससे वैश्विक ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन पर दबाव साफ दिख रहा है।
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यह शिपमेंट कितने समय से रुका हुआ है?
पोर्ट अधिकारियों के अनुसार, इस कंसाइनमेंट का यात्रा के दौरान ही रास्ता बदला गया था। और पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से चेन्नई पोर्ट पर खड़ा है। आगे की शिपिंग पूरी तरह गंतव्य बाजारों की स्थिति सामान्य होने पर निर्भर है।
यह स्थिति दिखाती है कि भू-राजनीतिक तनाव कैसे लैटिन अमेरिका के उत्पादन केंद्रों और खाड़ी देशों के बीच लॉन्ग-हॉल लॉजिस्टिक्स को प्रभावित कर रहे हैं।
पोर्ट अधिकारियों के अनुसार, इस कंसाइनमेंट का यात्रा के दौरान ही रास्ता बदला गया था। और पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से चेन्नई पोर्ट पर खड़ा है। आगे की शिपिंग पूरी तरह गंतव्य बाजारों की स्थिति सामान्य होने पर निर्भर है।
यह स्थिति दिखाती है कि भू-राजनीतिक तनाव कैसे लैटिन अमेरिका के उत्पादन केंद्रों और खाड़ी देशों के बीच लॉन्ग-हॉल लॉजिस्टिक्स को प्रभावित कर रहे हैं।
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मेक्सिको की भूमिका वैश्विक ऑटो उद्योग में क्या है?
मेक्सिको वैश्विक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र है, जहां जनरल मोटर्स, फोर्ड, निसान, स्टेलंटिस, फॉक्सवैगन, टोयोटा और बीएमडब्ल्यू जैसी बड़ी कंपनियों के प्लांट मौजूद हैं।
इनमें से कई कंपनियां अपने निर्यात के लिए उन समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं, जो खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। मौजूदा स्थिति में जहाज जोखिम वाले क्षेत्रों से बच रहे हैं, जिससे चेन्नई पोर्ट और कामराजर पोर्ट अस्थायी स्टोरेज पॉइंट बन गए हैं।
मेक्सिको वैश्विक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र है, जहां जनरल मोटर्स, फोर्ड, निसान, स्टेलंटिस, फॉक्सवैगन, टोयोटा और बीएमडब्ल्यू जैसी बड़ी कंपनियों के प्लांट मौजूद हैं।
इनमें से कई कंपनियां अपने निर्यात के लिए उन समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं, जो खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। मौजूदा स्थिति में जहाज जोखिम वाले क्षेत्रों से बच रहे हैं, जिससे चेन्नई पोर्ट और कामराजर पोर्ट अस्थायी स्टोरेज पॉइंट बन गए हैं।
पोर्ट पर लागत क्यों बढ़ रही है?
इस व्यवधान ने क्षेत्रीय बंदरगाहों के बीच लागत असमानता को भी उजागर किया है। चेन्नई और कामराजर पोर्ट दोनों RoRo (Roll-On/Roll-Off) शिपमेंट के लिए 20 दिन तक फ्री स्टोरेज देते हैं। लेकिन इसके बाद डिमरेज चार्ज तेजी से बढ़ जाते हैं, जिससे शिपमेंट में देरी होने पर लागत काफी बढ़ जाती है।
इस व्यवधान ने क्षेत्रीय बंदरगाहों के बीच लागत असमानता को भी उजागर किया है। चेन्नई और कामराजर पोर्ट दोनों RoRo (Roll-On/Roll-Off) शिपमेंट के लिए 20 दिन तक फ्री स्टोरेज देते हैं। लेकिन इसके बाद डिमरेज चार्ज तेजी से बढ़ जाते हैं, जिससे शिपमेंट में देरी होने पर लागत काफी बढ़ जाती है।
क्या सिर्फ कारों पर असर पड़ा है?
यह समस्या केवल ऑटोमोबाइल शिपमेंट तक सीमित नहीं है। चेन्नई पोर्ट से मध्य पूर्व के तेल उत्पादकों को भेजे जाने वाले बैराइट (बेरियम सल्फेट) के निर्यात पर भी असर पड़ा है।
यह खनिज ड्रिलिंग फ्लूड में इस्तेमाल होता है और तेल कुओं में दबाव और स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। जिससे अपस्ट्रीम ऑयल एक्सप्लोरेशन प्रभावित हो सकता है।
पोर्ट पर और क्या स्टॉक फंसा हुआ है?
एक पोर्ट अधिकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश से आया करीब 1.5 लाख टन बैराइट फिलहाल चेन्नई पोर्ट पर निर्यात के इंतजार में पड़ा हुआ है।
यह समस्या केवल ऑटोमोबाइल शिपमेंट तक सीमित नहीं है। चेन्नई पोर्ट से मध्य पूर्व के तेल उत्पादकों को भेजे जाने वाले बैराइट (बेरियम सल्फेट) के निर्यात पर भी असर पड़ा है।
यह खनिज ड्रिलिंग फ्लूड में इस्तेमाल होता है और तेल कुओं में दबाव और स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। जिससे अपस्ट्रीम ऑयल एक्सप्लोरेशन प्रभावित हो सकता है।
पोर्ट पर और क्या स्टॉक फंसा हुआ है?
एक पोर्ट अधिकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश से आया करीब 1.5 लाख टन बैराइट फिलहाल चेन्नई पोर्ट पर निर्यात के इंतजार में पड़ा हुआ है।