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Bike Taxi: कर्नाटक में फिर से बंद हुई बाइक टैक्सी, रैपिडो ने शुरी की 'बाइक डायरेक्ट', जानें डिटेल्स
Tue, 26 Aug 2025 03:19 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 26 Aug 2025 03:19 PM IST
सार
कर्नाटक हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद ओला, ऊबर और रैपिडो ने बाइक टैक्सी सेवाएं फिर से बंद कर दी हैं। इससे बंगलूरू के यात्रियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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Bike Taxi
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
कर्नाटक में बाइक टैक्सी सेवाएं (जैसे ओला, उबर, रैपिडो पर चलने वाली बाइक टैक्सी) एक बार फिर से रुक गई हैं। दो महीने की रोक के बाद जब ये सेवाएं थोड़े समय के लिए शुरू हुई थीं, तभी हाईकोर्ट के नए स्पष्टीकरण ने इन्हें फिर से रोक दिया।
हाईकोर्ट का स्पष्टीकरण
22 अगस्त को कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया कि उसने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था जिससे कंपनियां बाइक टैक्सी सेवाएं दोबारा शुरू कर सकें। कोर्ट का कहना था कि उसका पिछला आदेश केवल यह सुनिश्चित करने के लिए था कि बाइक टैक्सी चलाने वाले व्यक्तिगत राइडर्स पर कोई सख्त कार्रवाई न हो।
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हाईकोर्ट का स्पष्टीकरण
22 अगस्त को कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया कि उसने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था जिससे कंपनियां बाइक टैक्सी सेवाएं दोबारा शुरू कर सकें। कोर्ट का कहना था कि उसका पिछला आदेश केवल यह सुनिश्चित करने के लिए था कि बाइक टैक्सी चलाने वाले व्यक्तिगत राइडर्स पर कोई सख्त कार्रवाई न हो।
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यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
बंगलूरू जैसे शहरों में बाइक टैक्सी लोगों के लिए सस्ता और तेज साधन था। खासकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और रोजाना मेहनत मजदूरी करने वालों के लिए। अब सेवाएं बंद होने से ट्रैफिक और बढ़ेगा, लोगों की जेब पर ज्यादा खर्च पड़ेगा और यात्रा की दिक्कतें भी बढ़ेंगी।
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बंगलूरू जैसे शहरों में बाइक टैक्सी लोगों के लिए सस्ता और तेज साधन था। खासकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और रोजाना मेहनत मजदूरी करने वालों के लिए। अब सेवाएं बंद होने से ट्रैफिक और बढ़ेगा, लोगों की जेब पर ज्यादा खर्च पड़ेगा और यात्रा की दिक्कतें भी बढ़ेंगी।
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सोशल मीडिया पर नाराजगी
कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई। एक यात्री अमित ने लिखा, "माननीय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जी, फिर से बाइक टैक्सी पर रोक क्यों? खराब सड़कों और ट्रैफिक की वजह से लोग पहले ही परेशान हैं। अगर कोई सही वजह है तो समझाइए।"
एक और यूजर ने लिखा, "क्या बाइक टैक्सी ट्रैफिक और ऑटो ड्राइवरों की मनमानी का समाधान नहीं है? सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि बाइक टैक्सी कानूनी है।"
यह भी पढ़ें - Nitin Gadkari: गडकरी ने कहा- डीपीआर कंसल्टेंट्स पर बनाएं जाए रेटिंग सिस्टम, गुणवत्ता न होने पर देंगे जुर्माना
कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई। एक यात्री अमित ने लिखा, "माननीय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जी, फिर से बाइक टैक्सी पर रोक क्यों? खराब सड़कों और ट्रैफिक की वजह से लोग पहले ही परेशान हैं। अगर कोई सही वजह है तो समझाइए।"
एक और यूजर ने लिखा, "क्या बाइक टैक्सी ट्रैफिक और ऑटो ड्राइवरों की मनमानी का समाधान नहीं है? सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि बाइक टैक्सी कानूनी है।"
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कंपनियों को फिर से रोकना पड़ा
एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि ओला, उबर और रैपिडो ने ऐप पर बाइक टैक्सी सेवाएं दोबारा शुरू कर दी थीं, जबकि कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद सोमवार को इन कंपनियों ने सेवाएं वापस ले लीं, जिससे यात्री परेशान हो गए।
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एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि ओला, उबर और रैपिडो ने ऐप पर बाइक टैक्सी सेवाएं दोबारा शुरू कर दी थीं, जबकि कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद सोमवार को इन कंपनियों ने सेवाएं वापस ले लीं, जिससे यात्री परेशान हो गए।
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रैपिडो का नया कदम- 'बाइक डायरेक्ट'
रैपिडो ने 'बाइक डायरेक्ट' नाम की पहल शुरू की है, जो एक गैर-व्यावसायिक (नॉन-प्रॉफिट) प्रयास है। इसका मकसद उन बाइक टैक्सी चालकों (कैप्टन) की मदद करना है जिनकी रोजी-रोटी हाल की रोक की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई।
हालांकि कोर्ट ने व्यक्तिगत राइडर्स को स्वतंत्र रूप से सेवाएं देने की अनुमति दी थी। लेकिन प्लेटफॉर्म या ढांचे की कमी के कारण उन्हें बुकिंग नहीं मिल पा रही थी। रैपिडो ने साफ किया है कि यह कोई कमर्शियल सेवा नहीं बल्कि आजीविका बचाने का प्रयास है।
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रैपिडो ने 'बाइक डायरेक्ट' नाम की पहल शुरू की है, जो एक गैर-व्यावसायिक (नॉन-प्रॉफिट) प्रयास है। इसका मकसद उन बाइक टैक्सी चालकों (कैप्टन) की मदद करना है जिनकी रोजी-रोटी हाल की रोक की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई।
हालांकि कोर्ट ने व्यक्तिगत राइडर्स को स्वतंत्र रूप से सेवाएं देने की अनुमति दी थी। लेकिन प्लेटफॉर्म या ढांचे की कमी के कारण उन्हें बुकिंग नहीं मिल पा रही थी। रैपिडो ने साफ किया है कि यह कोई कमर्शियल सेवा नहीं बल्कि आजीविका बचाने का प्रयास है।
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