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Vehicle Loan: ब्याज दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा, फाडा ने की आरबीआई से दखल देने की मांग
Sat, 26 Jul 2025 08:55 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 26 Jul 2025 08:55 PM IST
सार
ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से निजी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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Vehicle Loan
- फोटो : Freepik
विस्तार
ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से निजी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फाडा का कहना है कि निजी बैंक आरबीआई की तरफ से की गई रेपो रेट कटौती का फायदा वाहन खरीदने वाले ग्राहकों तक समय पर नहीं पहुंचा रहे हैं। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक तुरंत इसका लाभ देते हैं।
आरबीआई गवर्नर को लिखी चिट्ठी
फाडा ने आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखकर कहा कि आपकी अगुवाई में आरबीआई ने अब तक की सबसे तेज ब्याज दरों में कटौती की है। जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। लेकिन इसका असर ऑटो रिटेल सेक्टर में नजर नहीं आ रहा। फाडा के उपाध्यक्ष साई गिरीधर ने कहा कि कई निजी बैंक अपने आंतरिक फंडिंग कॉस्ट का हवाला देते हुए ब्याज दरों में कटौती का फायदा देने में देरी कर रहे हैं।
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आरबीआई गवर्नर को लिखी चिट्ठी
फाडा ने आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखकर कहा कि आपकी अगुवाई में आरबीआई ने अब तक की सबसे तेज ब्याज दरों में कटौती की है। जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। लेकिन इसका असर ऑटो रिटेल सेक्टर में नजर नहीं आ रहा। फाडा के उपाध्यक्ष साई गिरीधर ने कहा कि कई निजी बैंक अपने आंतरिक फंडिंग कॉस्ट का हवाला देते हुए ब्याज दरों में कटौती का फायदा देने में देरी कर रहे हैं।
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बैंक लोन
- फोटो : Freepik
फाडा की मांग
फाडा ने आरबीआई से आग्रह किया कि सभी बैंकों पर ब्याज दर में बदलाव का लाभ समयबद्ध रूप से ग्राहकों तक पहुंचाने की अनिवार्यता लागू की जाए। साथ ही, निजी बैंकों की ओर से ऑटो लोन पर रेपो रेट पास-थ्रू में हो रही देरी की समीक्षा कर उन्हें इसके लिए सख्त निर्देश दिए जाएं। ताकि सभी ग्राहकों को समान लाभ मिल सके।
बैंकों की फंडिंग कॉस्ट हो सार्वजनिक
फाडा ने यह भी सुझाव दिया कि बैंकों की फंडिंग कॉस्ट से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक किया जाए। ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहक जान सकें कि उन्हें सही ब्याज दर मिल रही है या नहीं।
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फाडा ने आरबीआई से आग्रह किया कि सभी बैंकों पर ब्याज दर में बदलाव का लाभ समयबद्ध रूप से ग्राहकों तक पहुंचाने की अनिवार्यता लागू की जाए। साथ ही, निजी बैंकों की ओर से ऑटो लोन पर रेपो रेट पास-थ्रू में हो रही देरी की समीक्षा कर उन्हें इसके लिए सख्त निर्देश दिए जाएं। ताकि सभी ग्राहकों को समान लाभ मिल सके।
बैंकों की फंडिंग कॉस्ट हो सार्वजनिक
फाडा ने यह भी सुझाव दिया कि बैंकों की फंडिंग कॉस्ट से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक किया जाए। ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहक जान सकें कि उन्हें सही ब्याज दर मिल रही है या नहीं।
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Car Loan
- फोटो : Freepik
MSME लाभों में भेदभाव का आरोप
फाडा ने यह भी आरोप लगाया कि कई बैंक MSME (एमएसएमई) पंजीकृत डीलरशिप को कम ब्याज दर या प्राथमिकता वाला ऋण नहीं दे रहे हैं। जबकि Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन के तहत ऑटो वर्कशॉप, सर्विस सेंटर और छोटे डीलर एमएसएमई की श्रेणी में आते हैं। इसलिए आरबीआई को सभी बैंकों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए, ताकि एमएसएमई से जुड़ी सभी योजनाएं इन व्यवसायों तक भी पहुंच सकें।
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CGTMSE योजना में डीलरशिप को जोड़ने की मांग
फाडा ने मांग की है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) (सीजीटीएमएसई) की सुविधा ऑटो डीलरशिप और वर्कशॉप तक भी बढ़ाई जाए। फिलहाल अधिकृत डीलर और सर्विस सेंटर इस योजना के दायरे में नहीं आते, जिससे उन्हें जरूरी फाइनेंशियल सुरक्षा नहीं मिल पाती।
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फाडा ने यह भी आरोप लगाया कि कई बैंक MSME (एमएसएमई) पंजीकृत डीलरशिप को कम ब्याज दर या प्राथमिकता वाला ऋण नहीं दे रहे हैं। जबकि Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन के तहत ऑटो वर्कशॉप, सर्विस सेंटर और छोटे डीलर एमएसएमई की श्रेणी में आते हैं। इसलिए आरबीआई को सभी बैंकों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए, ताकि एमएसएमई से जुड़ी सभी योजनाएं इन व्यवसायों तक भी पहुंच सकें।
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CGTMSE योजना में डीलरशिप को जोड़ने की मांग
फाडा ने मांग की है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) (सीजीटीएमएसई) की सुविधा ऑटो डीलरशिप और वर्कशॉप तक भी बढ़ाई जाए। फिलहाल अधिकृत डीलर और सर्विस सेंटर इस योजना के दायरे में नहीं आते, जिससे उन्हें जरूरी फाइनेंशियल सुरक्षा नहीं मिल पाती।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
ऑटो लोन पर जोखिम भार कम करने की अपील
फाडा ने यह भी बताया कि बैंकों द्वारा ऑटो लोन पर 100 प्रतिशत रिस्क वेट लगाया जाता है, जबकि होम लोन पर यह सिर्फ 40 प्रतिशत होता है। जबकि वाहन भी आसानी से बेचे जा सकने वाले एसेट होते हैं। इसलिए ऑटो फाइनेंस पर रिस्क वेट कम किया जाए, जिससे अगले 5 वर्षों में 20 प्रतिशत तक लोन वितरण में बढ़ोतरी हो सकती है।
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वर्किंग कैपिटल और इन्वेंट्री फंडिंग की जरूरत
फाडा ने यह भी सुझाव दिया कि डीलरों की लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए खास वर्कशॉप और इन्वेंट्री फंडिंग योजनाएं शुरू की जाएं। ताकि शोरूम और सर्विस सेंटर्स ग्राहकों की बढ़ती मांग को आसानी से संभाल सकें।
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फाडा ने यह भी बताया कि बैंकों द्वारा ऑटो लोन पर 100 प्रतिशत रिस्क वेट लगाया जाता है, जबकि होम लोन पर यह सिर्फ 40 प्रतिशत होता है। जबकि वाहन भी आसानी से बेचे जा सकने वाले एसेट होते हैं। इसलिए ऑटो फाइनेंस पर रिस्क वेट कम किया जाए, जिससे अगले 5 वर्षों में 20 प्रतिशत तक लोन वितरण में बढ़ोतरी हो सकती है।
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वर्किंग कैपिटल और इन्वेंट्री फंडिंग की जरूरत
फाडा ने यह भी सुझाव दिया कि डीलरों की लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए खास वर्कशॉप और इन्वेंट्री फंडिंग योजनाएं शुरू की जाएं। ताकि शोरूम और सर्विस सेंटर्स ग्राहकों की बढ़ती मांग को आसानी से संभाल सकें।
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Car Showroom
- फोटो : Freepik
डीलरशिप स्टाफ को सीधे इंसेंटिव न दें बैंक: FADA
फाडा ने यह भी आपत्ति जताई कि कई बैंक डीलरशिप स्टाफ को सीधे इंसेंटिव दे रहे हैं, जिससे डीलरशिप की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। फाडा ने आरबीआई से मांग की है कि सभी बैंकों को निर्देश दें कि सभी इंसेंटिव केवल अधिकृत डीलरशिप अकाउंट्स के जरिए ही दिए जाएं।
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छोटे शहरों और गांवों में सस्ती क्रेडिट पहुंच की जरूरत
फाडा ने पत्र में यह भी कहा कि आरबीआई को ईवी फाइनेंस और छोटे शहरों/ग्रामीण क्षेत्रों में ऑटो लोन पर कम ब्याज दर और आसान लोन पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। ताकि पूरे देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में समान विकास हो सके।
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फाडा ने यह भी आपत्ति जताई कि कई बैंक डीलरशिप स्टाफ को सीधे इंसेंटिव दे रहे हैं, जिससे डीलरशिप की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। फाडा ने आरबीआई से मांग की है कि सभी बैंकों को निर्देश दें कि सभी इंसेंटिव केवल अधिकृत डीलरशिप अकाउंट्स के जरिए ही दिए जाएं।
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छोटे शहरों और गांवों में सस्ती क्रेडिट पहुंच की जरूरत
फाडा ने पत्र में यह भी कहा कि आरबीआई को ईवी फाइनेंस और छोटे शहरों/ग्रामीण क्षेत्रों में ऑटो लोन पर कम ब्याज दर और आसान लोन पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। ताकि पूरे देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में समान विकास हो सके।
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