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Old Cars: 10-15 साल पुरानी कारों पर प्रतिबंध लगाने पर सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज, जानें डिटेल्स

Thu, 19 Oct 2023 03:55 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 19 Oct 2023 03:55 PM IST
सार

गुरुग्राम में एक वकील ने 10 से 15 साल पुरानी कारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जिला अदालत में मामला दायर किया है।

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Case filed against govt officials for banning 10-15 year old cars in Gurugram
पुरानी कारें - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुरुग्राम में एक वकील ने 10 से 15 साल पुरानी कारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जिला अदालत में मामला दायर किया है। 'कार बंदी घोटाले' की साजिश में हरियाणा के परिवहन सचिव नवदीप सिंग विर्क (आईपीएस) और केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के अन्य आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
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अधिवक्ता मुकेश कुलथिया ने अदालत को बताया कि संशोधित मोटर वाहन अधिनियम 2019, 2021 और 2023 के अनुसार, डीजल और पेट्रोल दोनों कारों की लाइफ 15 वर्ष है, जिसके बाद यह अगले पांच वर्षों के लिए रिन्यूएबल (नवीकरणीय) है, इसलिए डीजल कार को सिर्फ इसलिए जब्त या प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने अपना 10 साल का जीवनकाल पूरा कर लिया है।
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Case filed against govt officials for banning 10-15 year old cars in Gurugram
पुरानी कारें - फोटो : सोशल मीडिया
कुलथिया का तर्क है कि यह प्रतिबंध संशोधित मोटर वाहन अधिनियम का घोर उल्लंघन है। वह कहते हैं कि डीजल कार और पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) 15 साल की वैधता के साथ जारी किया जा रहा है, जबकि रोड टैक्स भी उसी अवधि के लिए जमा कराया जा रहा है। वकील कुलथिया ने अदालत को सूचित किया कि कानून के अनुसार 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है और ये अधिकारी एनजीटी और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का गलत हवाला देकर 'अवैध' प्रतिबंध लगा रहे हैं।

कुलथिया ने कहा, "ये प्रतिबंध देश के संशोधित कानून का उल्लंघन हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने की साजिश के तहत विभिन्न अवैध रणनीति के जरिए लागू किए जा रहे हैं।" उनका कहना है कि उन्होंने इन अधिकारियों को कानूनी पहलुओं के बारे में लिखित रूप से और अदालती नोटिस के जरिए कई बार जानकारी दी। हालांकि, अधिकारियों ने "कानून का पालन करने से इनकार कर दिया।" इसलिए, वकील मुकेश कुलथिया के पास गुरुग्राम जिला न्यायालय में आपराधिक मामला दायर करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।
 
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