पृथ्वी लोक पर जो भी जन्म लेता है उसकी मृत्यु अवश्य होती है आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में प्रेवश करती है। जिस प्रकार से कपड़े मैले हो जाने पर उन्हें बदला जाता है उसी प्रकार समय पूर्ण हो जाने पर आत्म शरीर को त्यागकर दूसरे शरीर को धारण करती है। शरीर नश्वर है जबकि आत्मा अमर है। इसी तरह से एक जन्म से दूसरा जन्म का चक्र चलता रहता है। कई लोगों को पूर्वजन्म से जुड़ी बातों पर विश्वास नहीं होता है परंतु कुछ लोग पूर्वजन्म पर विश्वास करते हैं। पूर्वजन्म के विषय में हमारे वेदों व पुराणों में भी कई जगह उल्लेख मिलता है। जब कभी इस तरह की बातों का जिक्र होता है तो हर मनुष्य के मन में यह प्रश्न या जिज्ञासा अवश्य उत्पन्न होती है कि वह पिछले जन्म में क्या था। यदि आप पूर्वजन्म से जुड़े रहस्यों के बारे में जानना चाहते हैं तो व्यक्ति के लक्ष्णों व आदतों पर ध्यान देना पड़ता है। माना जाता है कि किसी भी व्यक्ति के पिछले जन्म की आदते उसके अगले जन्म में भी वैसी की वैसी ही रहती हैं। आइए जानते हैं पिछले जन्म से जुड़े रहस्यों के बारे में।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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जानकारों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति का जन्म सामान्यतः लौट-फिरकर उसी के घर परिवार में होता है। इसके पीछे कहा जाता है कि जब व्यक्ति की मृत्यु निकट होती है तब उसे जो भी कुछ अंत समय में याद रहता है उसकी गति वैसी ही हो जाती है। मनुष्य को सबसे अधिक अंत समय में सबसे अधिक अपने प्रियजनों परिवार की चिंता सताती है ऐसे में वह अगले जन्म में किसी न किसी प्रकार से उसी घर में जन्म ले लेता है। किसी भी व्यक्ति की पिछले जन्म की मुख्य आदतें वैसी ही रह जाती हैं ऐसे में व्यक्ति के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय कोई इच्छा अधूरी रह गई हो तो उसका जन्म अधूरी इच्छा को पूर्ण करने के लिए होता है।
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कभी-कभी व्यक्ति के शरीर पर कोई निशान आदि को देखकर भी पहचाना जा सकता है कि वह पिछले जन्म में क्या था। अगले जन्म में भी कुछ लोगों के शरीर पर वही निशान बने रह जाते हैं जो पहले बने थे। इसी तरह से देखने में आता है कि कुछ लोग बचपन से ही भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं या बहुत ही कम आयु में ही कठिन से कठिन मंत्रोच्चार भी आसानी से कर लेते हैं। दरअसल माना जाता है कि यह सब उनके पिछले जन्म के लक्षण व निशानी होते हैं। इसी तरह से कुछ लोगों में जीव-जंतुओं की आदते भी देखने को मिलती हैं उदाहरण के तौर पर जैसे कोई व्यक्ति अपनी गर्दन को ऊंट की भांति बहुत ऊंचा उठाकर चलता हो।
कई बार कुछ लोगों को पूर्व जन्म के कारण समस्याएं भी होने लगती हैं। यदि किसी के पूर्व जन्म के कर्म बाधा दे रहे हो तो उसे भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। शि ही सृष्टि के पहले गुरु हैं और शिव ही देवों के भी देव है और कालों के भी महाकाल हैं। पूर्वजन्म के संस्कारों के मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करने के साथ उनके मंत्रो का जाप करना चाहिए। इसके अलावा मनुष्य को पूर्व जन्म के कर्मों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना चाहिए और दान-पुण्य जैसे परोपकारी कार्यों में लगना चाहिए।