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Hindi News ›   Astrology ›   Utpanna Ekadashi 2021 date shubh muhurat Utpana Ekadashi vrat importance and pauranik katha of Shri Vishnu

Utpanna Ekadashi 2021: जानिए क्यों खास माना जाता है उत्पन्ना एकादशी व्रत, पढ़िए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Fri, 26 Nov 2021 07:18 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नयी दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नयी दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 26 Nov 2021 07:18 AM IST
सार

हिंदु धर्म ग्रंथों में एकादशी को एक पवित्र पर्व के रूप में माना जाता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में 2 एकदशी आती हैं, जिसमें एक शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है और दूसरी कृष्ण पक्ष की। उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। 

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Utpanna Ekadashi 2021 date shubh muhurat Utpana Ekadashi vrat importance and pauranik katha of Shri Vishnu
उत्पन्ना एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हिंदु धर्म ग्रंथों में एकादशी को एक पवित्र पर्व के रूप में माना जाता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में 2 एकदशी आती हैं, जिसमें एक शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है और दूसरी कृष्ण पक्ष की। एकादशी का शुभ फल प्राप्त करने के लिए इस व्रत का अनुष्ठान, पूजा-पाठ सब शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे नियम, भक्ति भाव और विश्वास के साथ रखा जाता है।  ऐसी मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने का फल अश्वमेघ यज्ञ और तीर्थ स्थानों में स्नान-दान आदि से मिलने वाले पुण्य से भी अधिक है। उत्पन्ना एकादशी व्रत में श्रीविष्णु की पूजा का विधान है। आइए जानते हैं  जानते हैं कि उत्पन्ना एकादशी कब मनाई जाएगी और क्या है इससे जुड़ी पौराणिक कथा। 

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Utpanna Ekadashi 2021 date shubh muhurat Utpana Ekadashi vrat importance and pauranik katha of Shri Vishnu
उत्पन्ना एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्पन्ना एकादशी  तिथि 

उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। 
उत्पन्ना एकादशी तिथि 2021: 30 नवंबर 2021 (मंगलवार),
एकादशी प्रारंभ: 30 नवंबर 2021- दोपहर 2 बजे,
एकादशी समाप्त: 1 दिसंबर 2021- दोपहर 12: 55 मिनट.
व्रत पारण का समय: 1 दिसंबर 2021 दिन बुधवार को प्रातः 7: 40 मिनट से प्रातः 9:00 बजे तक 

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Utpanna Ekadashi 2021 date shubh muhurat Utpana Ekadashi vrat importance and pauranik katha of Shri Vishnu
उत्पन्ना एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : google

उत्पन्ना एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा

उत्पन्ना एकादशी की कथा के अनुसार सतयुग में मुरु नाम का एक असुर था जो बहुत अत्याचारी था। मुरु नाम के इस असुर ने देवलोक में सभी देवों को परास्त कर भाग दिया और इन्द्र देव को अपना बंधक बना लिया। सभी देवता अपनी इस समस्या को लेकर भगवान शिव के पास गए और तब भगवान शिव ने उन्हें क्षीरसागर में भगवान श्री विष्णु के पास जाकर उनसे सहायता मांगने का आदेश दिया। 

सभी देवता क्षीरसागर पहुंचे और श्रीविष्णु से अपनी व्यथा बताई । भगवान विष्णु ने स्वयं रणभूमि में जाकर असुर मुरु से युद्ध आरंभ किया। कहते हैं यह युद्ध दस हजार वर्षों तक चला। सभी दैत्य सेन मारी गई लेकिन मुरु ने हार नहीं मानी और घायल होने के बाद भी श्री विष्णु से युद्ध करता रहा। भगवान विष्णु ने जब मुरु को घायल अवस्था में देखा तो वे बद्रिकाश्रम की हेमवती नामक गुफा में विश्राम करने चले गए।

जब श्रीविष्णु  योगनिद्रा में थे तब मुरु उनका पीछा करते हुए वहां पहुंचा और जैसे ही उसने भगवान को मारने का प्रयास किया तभी वहां एक प्रकाश पुंज उत्पन्न हुआ। उस पुंज से एक देवी प्रकट हुईं और उस देवी ने मुरु असुर का  वध कर दिया।

जिससे एकादशी देवी प्रकट हुई और देवी ने उस दैत्य का वध कर दिया। मान्यता है कि वह देवी श्री विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई थी। विष्णु भगवान ने उस देवी को वरदान देते हुए कहा कि जो लोग माया मोह में बंधे हुए हैं उन्हें मुझ तक लाने में तुम सहायक होगी। तुम्हारी पूजा अर्चना करने वाले भक्त हमेशा सुखी और समृद्ध रहेंगे। कहते हैं तभी से  एकादशी देवी के रूप में उनकी पूजा अर्चना होती है। 

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