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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Venus Transit 2025 Shukra Gochar In Taurus Impact On Taurus Zodiac Sign

Venus Transit 2025 : शुक्र का राशि परिवर्तन, जानिए वृषभ राशि के जातकों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव

Sun, 29 Jun 2025 12:08 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 29 Jun 2025 12:08 PM IST
सार

Venus Transit 2025 : वृषभ राशि के जातकों के लिए शुक्र ग्रह लग्न भाव और छठे भाव के स्वामी होते हैं और 29 जून को वृषभ राशि में गोचर करने से यह आपके पहले भाव में होंगे। शुक्र ग्रह अपनी ही राशि में कुंडली के पहले भाव में होने से शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी।

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Venus Transit 2025 Shukra Gochar In Taurus Impact On Taurus Zodiac Sign
शुक्र का वृषभ राशि में गोचर - फोटो : Freepik

विस्तार

Venus Transit 2025 : 29 जून को भौतिक सुख-सुविधाओं और भोग-विलास के कारक ग्रह शुक्र वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। वृषभ राशि के स्वामी स्वयं शुक्रदेव होते हैं और यह इस राशि में 26 जुलाई तक रहेंगे फिर इसके बाद मिथुन राशि में चले जाएंगे। शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि में गोचर करने से मालव्य राजयोग का निर्माण होगा। जिसे ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं शुक्र के राशि परिवर्तन करने से वृषभ राशि के जातकों पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा। 

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शुक्र गोचर से वृषभ राशि पर प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों के लिए शुक्र ग्रह लग्न भाव और छठे भाव के स्वामी होते हैं और 29 जून को वृषभ राशि में गोचर करने से यह आपके पहले भाव में होंगे। शुक्र ग्रह अपनी ही राशि में कुंडली के पहले भाव में होने से शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। इस दौरान आपको सभी तरह के भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होगी। लाभ के मौकों में वृद्धि देखने को मिलेगी। आर्थिक मामलों में आपको शुक्र के गोचर का लाभ जरूर मिलेगा। वहीं प्रेम संबंधों में यह आपके लिए अनुकूल रहेगा। 
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ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को बहुत ही शुभ और लाभकारी ग्रह माना जाता है। कालपुरुष की कुंडली में यह दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह का गोचर एक से दूसरी राशि में होने के लिए करीब 27 दिनों का समय लगता है। 
- शुक्र मीन राशि में उच्च के होते हैं जबकि कन्या राशि में नीच की अवस्था में होते हैं। इसके साथ सभी 27 नक्षत्रों में ये पूर्वाषाढ़ा, भरणी और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी होते हैं। 
- शुक्र ग्रह की शनि और बुध ग्रह के साथ मित्रता का भाव रहता है जबकि चंद्रमा और सूर्य इनके शत्रु माने जाते हैं। 
- शुक्र ग्रह कुंडली में जब अपनी स्वराशि यानी वृषभ या तुला में या फिर अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान होकर कुंडली के केंद्र भाव में होते हैं तो मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। इस योग से व्यक्ति को जीवन में सभी तरह की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है। 
- इसके अलावा एक दूसरा राजयोग बनता है लक्ष्मी नारायण राजयोग। इस में बुध और शुक्र की युति किसी भाव में बनने पर होती है। 
- जिन लोगों की कुंडली में शुक्र कमजोर होते हैं, उनको जीवन में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- शुक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं।

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