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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Saturn Transit 2025 Shani Vakri For 138 Days Know Effect On Sagittarius Zodiac Signs

Saturn Transit 2025: मीन राशि में शनि हुए वक्री, जानें मीन राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव

Fri, 18 Jul 2025 04:23 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 18 Jul 2025 04:23 PM IST
सार

Shani Vakri 2025: धनु राशि के जातकों के लिए शनि दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी होते है और अब यह आपके चौथे भाव में वक्री हुए हैं। चौथे भाव शनि के गोचर होने से शनि की ढैय्या होती है जिसे अच्छा परिणाम देने वाला नहीं माना जाता है।

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Saturn Transit 2025 Shani Vakri For 138 Days Know Effect On Sagittarius Zodiac Signs
शनि मीन राशि में हुए वक्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Shani Vakri 2025: शनिदेव को ज्योतिष में कर्मफलदाता और न्यायाधिपति कहा जाता है। यह व्यक्तियों को उनके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनिदेव अगर शुभ स्थान पर होते हैं उनको जीवन में शुभ फल वहीं जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थान पर होते हैं उनको तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 13 जुलाई को शनि मीन राशि में रहते हुए वक्री हो गए हैं जो 138 दिनों तक रहेंगे। आइए जानते हैं शनि के वक्री होने से धनु राशि वालों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिल रहा है। 

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धनु राशि पर शनि के वक्री का प्रभाव
धनु राशि के जातकों के लिए शनि दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी होते है और अब यह आपके चौथे भाव में वक्री हुए हैं। चौथे भाव शनि के गोचर होने से शनि की ढैय्या होती है जिसे अच्छा परिणाम देने वाला नहीं माना जाता है। शनि के वक्री होने से आपके स्थान में परिवर्तन के योग बन रहे हैं। इसके अलावा शनि की नकारात्मकता में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इस दौरान आपको वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी होगी। 
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ज्योतिष में शनि ग्रह 
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है। 
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होती है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं। 
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं। 
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और  औजारों के कारक ग्रह होते हैं।  शनिदेव अनुराधा, पुष्य  और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं। 
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