Ramal Jyotish Vigyan: क्या है रमल विद्या? जानें भगवान शिव ने कैसे इस विद्या से की थी अधूरी इच्छा पूरी
What is the Ramal Astrology: रमल विद्या में प्रश्नों के आधार पर भविष्य कथन किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार की कुंडली की आवश्यकता नहीं होती। इसमें भविष्य पासों के माध्यम से देखा जाता है।
विस्तार
Ramal Prashna Jyotish: रमल ज्योतिष विज्ञान ज्योतिष शास्त्र की शाखाओं में से एक है। ज्योतिष की इस शाखा का जन्म भारत में ही हुआ था। भारत में विकसित हुई यह विद्या दूर-दूर तक फैल गई लेकिन भारत में इसका प्रभाव काम हो गया। मान्यता है कि मुगलों के आगमन के बाद अरब देशों में रमल विद्या को आश्रय मिला और फिर अरब में ही इसका विकास हुआ। इसलिए रमल ज्योतिष विद्या का विकास अरब से माना जाता है। भारतीयों की तरह मुसलमान ज्योतिष विद्या के अन्य सूक्ष्म तत्वों को जानते नहीं थे। अत: उनके समय में इसका प्रचार अधिक हुआ। अरब में इसे इल्म-ए-रमल कहा जाता है। कुछ मुसलमान ज्योतिषी रमल विद्या को भारत के प्राचीन बिंदु विज्ञान का भाग मानते हैं, जोकि हजारों सालों से लुप्त है।
रमल ज्योतिष का भगवान शिव से संबंध
मान्यता है कि महासती के वियोग से व्याकुल भगवान शिव के समक्ष महाभैरव ने चार बिन्दु बना दिए और उनसे उसी में अपनी इच्छित प्रिया सती को खोजने के लिए कहा। विशेष विधान से उन्होंने इसे सिद्ध करके सातवें लोक में अपनी प्रियतमा को देखा। तभी से इस रेखा और बिन्दु शास्त्र का प्रादुर्भाव हुआ। एक अन्य मान्यता के अनुसार एक बार एक व्यक्ति अरब के रेगिस्तान में चल रहा था, अंतत: चलते-चलते थक गया। चारों ओर बालू ही बालू दिखाई देती थी। वह गंतव्य का मार्ग भूल गया और बड़ा चिंतित हुआ। तब साक्षात शक्ति ने आकर उसके सामने चार रेखा और चार बिन्दु बना दिए। उसे एक ऐसी विधि बताई कि वह गंतव्य स्थान का मार्ग जान गया। वहीं से इस शास्त्र की उत्पत्ति हुई।
प्रश्नों के आधार पर भविष्य कथन
रमल विद्या में प्रश्नों के आधार पर भविष्य कथन किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार की कुंडली की आवश्यकता नहीं होती। इसमें भविष्य पासों के माध्यम से देखा जाता है। प्रश्नकर्ता के प्रश्न पूछते ही रमल ज्योतिषाचार्य एक विशेष प्रकार के चार्ट पर पासे फेंकता है। पासे में विभिन्न तरह के बिंदु बने होते हैं जिन्हें शकलें कहा जाता है। जो शकल आती है उसी के हिसाब से भविष्य कथन किया जाता है।
पासे का होता है प्रयोग
रमल शास्त्र में किसी भी प्रकार की समस्या के लिए और उसके समाधान के लिए पास डाल जाता है। पासे को अरभी भाषा में 'कुरा' कहते हैं। कुरा को प्रश्न पूछने वाले के हाथों से एक विशेष प्रकार के चार्ट पर डलवाया जाता है। पास फेंकने के बाद उससे प्राप्त हुई शकल आकृत से रमल गणित के मुताबिक प्रस्तार यानी जायचा बनाया जाता है। रमल ज्योतिष उन लोगों के लिए एक सटीक विकल्प है जिनके पास अपनी जन्मकुंडली नहीं है या जिन्हें अपनी जन्मतिथि ज्ञात नहीं है। रमल ज्योतिष से भविष्य काफी हद तक सटीक बैठता है।
कैसे बनता है जायचा
रमल ज्योतिष शास्त्र में पासा या कुरा डालने के बाद प्रस्तार यानी जायचा बनाया जाता है। प्रस्तार या जायचा के 16 घर होते हैं। जायचा में 1,5,9 और 13वां घर अग्नि तत्व, 2,6,10,14वां घर वायु तत्व का, 3,7,11 और 15 वां घर जल तत्व का और 4,8,12 और 16 वां घर पृथ्वी से संबंधित होता है। रमल विद्या के अनुसार, कुरा से 16 तरह की जो आकृति बनती हैं उन्हीं के आधार पर कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता और भविष्य के बारे में जानने का प्रयास किया जाता है।
रमल की 16 शकल
रमल की 16 शकल को इस तरह विभाजित किया गया है
- लहियान खारिज
- कब्जुल दाखिल
- कब्जुल खारिज
- जमात
- फरहा मुंकलिब
- उक्ला मुंकलिब
- अंकिश दाखिल
- हुमरा साबित
- बयाज साबित
- नस्त्रुल खारिज
- नस्त्रुल दाखिल
- अतवे खारिज
- नकी मुंकलिब
- अतवे दाखिल
- इज्जतमा साबित
- तरीक मुंकलिब
क्या है इसका अर्थ
- यदि प्रश्नकर्ता दांपत्य जीवन को लेकर सवाल करे और रमलाचार्य के डाले गए पासों में लहियान खारिज शकल आए जो समझें जीवनसाथी प्रेम का दिखावा कर रहा है, उसका प्रेम सच्चा नहीं है।
- भविष्य कथन यदि कब्जुल दाखिल आए तो इसका अर्थ है जीवनसाथी बहुत प्रेम करेगा।
- यदि जमात साबित आए तो समझें परेशानियों के बाद दांपत्य जीवन सुखमय होगा।
- इसी तरह अलग-अलग शकलों के अननुसार भविष्य कथन किया जाता है।