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Planet Aspects: ज्योतिष में क्या होती है ग्रहों की द्दष्टियां और इनका कैसा होता है प्रभाव
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Planet Aspects: ज्योतिष में क्या होती है ग्रहों की द्दष्टियां और इनका कैसा होता है प्रभाव
- फोटो : अमर उजाला
वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों का जितना महत्व है, उतना ही उनकी द्दष्टियों का भी होता है। हर एक जातक की कुंडली के 12 भावों में सभी 9 ग्रह कहीं न कहीं जरूर बैठे हुए होते हैं जो उस भाव पर अपना प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा ग्रह अन्य भावों पर भी अपनी द्दष्टि डालते हैं। यह द्दष्टि शुभ या अशुभ दोनों ही तरह की हो सकती है। आइए जानते हैं ग्रहों की द्दष्टियां कैसी होती है और जातक के जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
ग्रहों की द्दष्टि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रह जिस स्थान पर बैठता है वहां अपना प्रभाव तो डालता ही है साथ ही साथ दूसरे भावों पर भी अपनी द्दष्टि रखता है। ग्रह की द्दष्टि का मतलब होता है वह स्थान, जहां पर ग्रह देखता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रह जिस स्थान पर विराजमान होता है, वहां पर तो उसका पूर्ण प्रभाव रहता ही है, साथ ही दूसरे घर और वहां पर बैठे अन्य ग्रहों पर भी अपनी शुभ या अशुभ द्दष्टि के द्वारा प्रभाव डालते हैं। अगर ग्रह शुभ है तो वह अपनी शुभ द्दष्टि से जिस भाव को देखता है अथवा वहां पर बैठे ग्रहों पर अपनी शुभ द्दष्टि डालता है तो उस ग्रह और भाव के अच्छे परिणामों में बढ़ोतरी कर देते हैं। इस तरह अगर अशुभ ग्रहों की द्दष्टि जिस ग्रह या भाव में पड़ती है उसके शुभ प्रभावों में कमी कर देते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के नियम के मुताबिक, अगर कोई शुभ ग्रह किसी पापी ग्रह पर अपनी द्दष्टि डाले तो पाप ग्रह के बुरे प्रभावों में कमी हो जाती है। वहीं इसके विपरीत एक पाप ग्रह शुभ ग्रह को देखें तो शुभ ग्रह की शुभता में कमी आ जाती है।
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ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार ग्रह जहां पर बैठा होता है वहां से अपनी सातवीं द्दष्टि डालता है। यानी ग्रह अपने से 180 डिग्री पर मौजूद ग्रहों और भाव पर पूर्ण द्दष्टि डालता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं जैसे अगर किसी जातक की कुंडली के पहले भाव में सूर्यदेव बैठे हैं तो वह अपने से सातवें भाव पर पूर्ण द्दष्टि डालेंगे और अगर सातवें भाव में कोई ग्रह भी है तो उस पर भी सूर्य की सप्तम द्दष्टि पड़ेगी।
सभी ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु अपने से सातवें स्थान पर पूर्ण द्दष्टि रखते हैं। लेकिन सभी ग्रहों में मंगल, गुरु और शनि की सातवीं द्दष्टि के साथ-साथ कुछ विशेष द्दष्टियां भी होती हैं।
मंगल की सातवीं द्दष्टि के साथ-साथ चौथी और आठवीं द्दष्टि भी होती है। जैसे मंगल अगर किसी कुंडली के पहले भाव में स्थित है तो वह अपनी सातवीं द्दष्टि कुंडली के सातवें भाव पर तो डालेगा ही, साथ-साथ ही कुंडली के चौथे और अष्टम भाव पर भी पूर्ण द्दष्टि से देखेगा।
गुरु की सातवीं द्दष्टि के अलावा दो और विशेष द्दष्टियां होती हैं पांचवीं और नौवीं। जैसे अगर किसी जातक की कुंडली के पहले भाव में गुरु है तो वह अपनी सातवीं द्दष्टि सप्तम भाव पर डालेगा। इसके अलावा अपनी पांचवीं और नौवी द्दष्टि से कुंडली के पंचम और नवम भाव को देखकर प्रभावित करेगा।
शनिदेव को तीन विशेष द्दष्टियां मिली हुई हैं। सातवीं, तीसरी और दसवीं द्दष्टि। वहीं राहु और केतु पंचम और नवम भाव में पूर्ण दृष्टि रखते हैं।
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ग्रहों की द्दष्टि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रह जिस स्थान पर बैठता है वहां अपना प्रभाव तो डालता ही है साथ ही साथ दूसरे भावों पर भी अपनी द्दष्टि रखता है। ग्रह की द्दष्टि का मतलब होता है वह स्थान, जहां पर ग्रह देखता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रह जिस स्थान पर विराजमान होता है, वहां पर तो उसका पूर्ण प्रभाव रहता ही है, साथ ही दूसरे घर और वहां पर बैठे अन्य ग्रहों पर भी अपनी शुभ या अशुभ द्दष्टि के द्वारा प्रभाव डालते हैं। अगर ग्रह शुभ है तो वह अपनी शुभ द्दष्टि से जिस भाव को देखता है अथवा वहां पर बैठे ग्रहों पर अपनी शुभ द्दष्टि डालता है तो उस ग्रह और भाव के अच्छे परिणामों में बढ़ोतरी कर देते हैं। इस तरह अगर अशुभ ग्रहों की द्दष्टि जिस ग्रह या भाव में पड़ती है उसके शुभ प्रभावों में कमी कर देते हैं।
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ज्योतिष शास्त्र के नियम के मुताबिक, अगर कोई शुभ ग्रह किसी पापी ग्रह पर अपनी द्दष्टि डाले तो पाप ग्रह के बुरे प्रभावों में कमी हो जाती है। वहीं इसके विपरीत एक पाप ग्रह शुभ ग्रह को देखें तो शुभ ग्रह की शुभता में कमी आ जाती है।
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ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार ग्रह जहां पर बैठा होता है वहां से अपनी सातवीं द्दष्टि डालता है। यानी ग्रह अपने से 180 डिग्री पर मौजूद ग्रहों और भाव पर पूर्ण द्दष्टि डालता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं जैसे अगर किसी जातक की कुंडली के पहले भाव में सूर्यदेव बैठे हैं तो वह अपने से सातवें भाव पर पूर्ण द्दष्टि डालेंगे और अगर सातवें भाव में कोई ग्रह भी है तो उस पर भी सूर्य की सप्तम द्दष्टि पड़ेगी।
सभी ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु अपने से सातवें स्थान पर पूर्ण द्दष्टि रखते हैं। लेकिन सभी ग्रहों में मंगल, गुरु और शनि की सातवीं द्दष्टि के साथ-साथ कुछ विशेष द्दष्टियां भी होती हैं।
मंगल की सातवीं द्दष्टि के साथ-साथ चौथी और आठवीं द्दष्टि भी होती है। जैसे मंगल अगर किसी कुंडली के पहले भाव में स्थित है तो वह अपनी सातवीं द्दष्टि कुंडली के सातवें भाव पर तो डालेगा ही, साथ-साथ ही कुंडली के चौथे और अष्टम भाव पर भी पूर्ण द्दष्टि से देखेगा।
गुरु की सातवीं द्दष्टि के अलावा दो और विशेष द्दष्टियां होती हैं पांचवीं और नौवीं। जैसे अगर किसी जातक की कुंडली के पहले भाव में गुरु है तो वह अपनी सातवीं द्दष्टि सप्तम भाव पर डालेगा। इसके अलावा अपनी पांचवीं और नौवी द्दष्टि से कुंडली के पंचम और नवम भाव को देखकर प्रभावित करेगा।
शनिदेव को तीन विशेष द्दष्टियां मिली हुई हैं। सातवीं, तीसरी और दसवीं द्दष्टि। वहीं राहु और केतु पंचम और नवम भाव में पूर्ण दृष्टि रखते हैं।
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