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Astrology: जानिए ज्योतिष में सभी नौ ग्रहों का महत्व और इनका कारकत्व
सार
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में 9 प्रमुख ग्रहों के बारे में बताया गया है। दो ग्रह राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है। ये नौ ग्रह इस प्रकार हैं- सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु।
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astrology and planets
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वैदिक ज्योतिष का मूलभूत आधार 12 राशियां, 12 भाव, 27 नक्षत्र और 9 ग्रह होते हैं। आज हम आपको ग्रहों के बारे में विस्तार से बताएंगे। ज्योतिष के अनुसार ग्रह जातकों के जीवन पर सीधे तौर पर विशेष प्रभाव डालते हैं। आइए जानते हैं ज्योतिष शास्त्र में ग्रह क्या होते हैं और इनका कितना बड़ा महत्व होता है।
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चंद्र ग्रह- 9 ग्रहों में दूसरा ग्रह चंद्रमा को माता, मन और रानी का कारक ग्रह माना गया है।
मंगल ग्रह- ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह साहस, शक्ति, सेना और युद्ध का कारक ग्रह माना गया है।
बुध ग्रह- बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, तर्क और संचार का कारक ग्रह माना गया है।
गुरु ग्रह- गुरु ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में शिक्षा, संतान, धर्म और धन का कारक ग्रह माना जाता है।
शुक्र ग्रह- शुक्र ग्रह को भौतिक सुख-सुविधा, सौंदर्य, रोमांस, कला, भोग-विलास और विवाह का कारक ग्रह माना गया है।
शनि ग्रह- शनि ग्रह को ज्योतिष में कर्म और न्याय का कारक ग्रह माना गया है। यह सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं।
राहु ग्रह- राहु को छाया ग्रह माना गया है। ज्योतिष में राहु को ग्रह नहीं माना जाता है।
केतु ग्रह- केतु भी राहु की तरह एक छाया ग्रह है। ज्योतिष में केतु को पिछले जीवन में किए गए कर्म और संचित कर्म के बारे में बताता है।
ज्योतिष गणना में ग्रहों का महत्व
जब किसी जातक का जन्म होता है और तब ही सौरमंडल में ग्रह जिस स्थिति में होते हैं उसी से जन्म कुंडली बनती है। इस जन्म कुंडली में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के बारे में पता चलता है। इन ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर सीधे तौर पर पड़ता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सभी 9 ग्रह कुंडली के 12 भावों के कारक भी होते हैं। आइए जानते हैं।
सूर्य- कुंडली के पहले, नवम और दशम के कारक होते हैं।
चंद्रमा- कुंडली के चौथे भाव के कारक होते हैं।
मंगल- कुंडली के तीसरे और छठे भाव के कारक होते हैं।
बुध- कुंडली के चौथे और दशम भाव के कारक होते हैं।
बृहस्पति- कुंडली के द्वितीय, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव के कारक होते हैं।
शुक्र- कुंडली के सप्तम और द्वादश भाव के कारक होते हैं।
शनि- कुंडली के षष्टम, अष्टम और दशम भाव के कारक होते हैं।
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ग्रह क्या होते हैं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस आकाश मंडल में कुछ खगोलीय पिंड होते हैं जो गति की अवस्था में रहते हैं। ग्रह हमारे सौर मंडल में सूर्य की परिक्रमा करते हैं और गुरुत्वाकर्षण के कारण एक दूसरे से निश्चित दूरी पर आपस में संचालित होते हैं। आकाश मंडल में ये ग्रह पृथ्वी पर रहने के वाले सभी तरह के प्राणियों के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में 9 प्रमुख ग्रहों के बारे में बताया गया है। दो ग्रह राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है। ये नौ ग्रह इस प्रकार हैं- सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु।
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9 ग्रहों का स्वभाव और कारकत्व
सूर्य ग्रह- ज्योतिष में सभी 9 ग्रहों में सूर्य केंद्र ग्रह है। सूर्य ग्रहों के राजा, पिता, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, आत्मा और ऊर्जा का कारक ग्रह माना गया है।
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चंद्र ग्रह- 9 ग्रहों में दूसरा ग्रह चंद्रमा को माता, मन और रानी का कारक ग्रह माना गया है।
मंगल ग्रह- ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह साहस, शक्ति, सेना और युद्ध का कारक ग्रह माना गया है।
बुध ग्रह- बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, तर्क और संचार का कारक ग्रह माना गया है।
गुरु ग्रह- गुरु ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में शिक्षा, संतान, धर्म और धन का कारक ग्रह माना जाता है।
शुक्र ग्रह- शुक्र ग्रह को भौतिक सुख-सुविधा, सौंदर्य, रोमांस, कला, भोग-विलास और विवाह का कारक ग्रह माना गया है।
शनि ग्रह- शनि ग्रह को ज्योतिष में कर्म और न्याय का कारक ग्रह माना गया है। यह सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं।
राहु ग्रह- राहु को छाया ग्रह माना गया है। ज्योतिष में राहु को ग्रह नहीं माना जाता है।
केतु ग्रह- केतु भी राहु की तरह एक छाया ग्रह है। ज्योतिष में केतु को पिछले जीवन में किए गए कर्म और संचित कर्म के बारे में बताता है।
ज्योतिष गणना में ग्रहों का महत्व
जब किसी जातक का जन्म होता है और तब ही सौरमंडल में ग्रह जिस स्थिति में होते हैं उसी से जन्म कुंडली बनती है। इस जन्म कुंडली में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के बारे में पता चलता है। इन ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर सीधे तौर पर पड़ता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सभी 9 ग्रह कुंडली के 12 भावों के कारक भी होते हैं। आइए जानते हैं।
सूर्य- कुंडली के पहले, नवम और दशम के कारक होते हैं।
चंद्रमा- कुंडली के चौथे भाव के कारक होते हैं।
मंगल- कुंडली के तीसरे और छठे भाव के कारक होते हैं।
बुध- कुंडली के चौथे और दशम भाव के कारक होते हैं।
बृहस्पति- कुंडली के द्वितीय, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव के कारक होते हैं।
शुक्र- कुंडली के सप्तम और द्वादश भाव के कारक होते हैं।
शनि- कुंडली के षष्टम, अष्टम और दशम भाव के कारक होते हैं।