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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Guru Gochar 2025 Jupiter Transit in Cancer Impact On Gemini Zodiac Sign

Guru Gochar 2025: देवगुरु बृहस्पति का उच्च राशि कर्क में गोचर, जानिए मिथुन राशि पर प्रभाव

Sat, 25 Oct 2025 05:54 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 25 Oct 2025 05:54 PM IST
सार

Guru Gochar 2025:  देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि के जातकों की कुंडली में सातवें भाव के स्वामी के साथ-साथ कर्म स्थान के भी स्वामी होते हैं। देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर आपके दूसरे भाव यानी धन और वाणी के स्थान पर हुआ है। गुरु का दूसरे भाव में गोचर अच्छा और शुभ परिणाम वाला होता है।

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Guru Gochar 2025 Jupiter Transit in Cancer Impact On Gemini Zodiac Sign
Guru Gochar 2025: गुरु को शुभ, अच्छा फल देने वाला और एक सौम्य ग्रह माना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Guru Gochar 2025: शुभ ग्रह माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति अब कर्क राशि में गोचर हैं। आपको बता दें कि कर्क राशि में गुरु का गोचर बीते 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर करीब 12 बजकर 57 मिनट पर हुआ था। ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, प्रसिद्धि, समृद्धि और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु मजबूत होते हैं उनको धन, मान-सम्मान और उन्नति का लाभ मिलता है। देवगुरु किसी एक राशि में करीब 1 वर्षों तक रहते हैं। लेकिन इस साल से गुरु अतिचारी अवस्था में है जिसके कारण गुरु की चाल में तेजी है। 11 नवंबर 2025 को गुरु वक्री हो जाएंगे और फिर वक्री अवस्था में 4 दिसंबर 2025 को मिथुन राशि में वापस लौट आएंगे। गुरु के स्वराशि कर्क में गोचर करने से सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलेगा। ऐसे में आइए जानते हैं मिथुन राशि पर गुरु के गोचर का किस तरह प्रभाव देखने को मिलेगा। इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। 
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मिथुन राशि पर गुरु गोचर का प्रभाव
देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि के जातकों की कुंडली में सातवें भाव के स्वामी के साथ-साथ कर्म स्थान के भी स्वामी होते हैं। देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर आपके दूसरे भाव यानी धन और वाणी के स्थान पर हुआ है। गुरु का दूसरे भाव में गोचर अच्छा और शुभ परिणाम वाला होता है। ऐसे में आपको धन के साथ-साथ कार्यक्षेत्र में भी अच्छे परिणाम के संकेत हैं। आर्थिक मामलों में गुरु को गोचर अच्छा परिणाम देगा। लाभ के लिए सकारात्मक स्थितियों का निर्माण होगा। विवाह और धन के मामले में आपको अच्छे रिजल्ट की प्राप्ति होगी। 
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वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है। 
- गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी होते हैं। 
- कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं जबकि मकर राशि में नीच के होते हैं। 
- गुरु बृहस्पति को तीन विशेष द्दष्टियां प्राप्त है। पांचवी, सातवीं और नौवीं द्दष्टि।
- वैदिक ज्योतिष में गुरु बड़े भाई, शिक्षा, धन, संतान, ज्ञान और शिक्षा के कारक होते हैं। 
- गुरु बृहस्पति पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के स्वामी होते हैं। 
- जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव यानी लग्न में गुरु स्वयं बैठ जाएं तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली और ज्ञानी होता है। 
- कालपुरुष की कुंडली में गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं और यह दूसरे, पांचवें, नौवें,दसवें और ग्यारहवें भाव के कारक होते है। 
- गुरु के दूसरे भाव में यानी धन के भाव में होने पर जातक बहुत धनी और समृद्धिशाली रहता है। 
-जब गुरु कुंडली के पांचवें भाव में होते हैं या फिर पाचवें भाव पर द्दष्टि डालते हैं तो जातक को उच्च शिक्षा और गुणी संतान की प्राप्ति होती है। 
- नवम भाव में गुरु के होने पर व्यक्ति शिक्षा और ज्ञान में परांगत होता है। कुंडली का दशम भाव कार्यक्षेत्र, करियर या पेशे का होता है दशम में गुरु हो तो व्यक्ति समाज में खूब प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है। 
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का ग्यारहवां भाव आय और लाभ का होता है। गुरु के इस भाव में होने पर जातक बहुत धन अर्जित करने में कामयाब होता है। 
- गुरु के कमजोर होने पर जातक को लीवर, किडनी, मधुमेह, पीलिया, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है। 
- गुरु का रत्न पुखराज होता है। केले के वृक्ष को गुरु के रूप में पूजा जाता है। बृहस्पति गुरु पीले रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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