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Astrology: जानें मंगल ग्रह की अन्य ग्रहों के साथ युति का फल किस तरह मिलता है

Thu, 23 Feb 2023 09:11 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 23 Feb 2023 09:11 AM IST
सार

जानिए जब मंगल ग्रह की युति सभी अन्य ग्रहों के साथ होती है तो इस तरह के फल की प्राप्ति होती है।

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according to astrology conjunction of mars with other planets what kind of results geting
मंगल-सूर्य युति से मिलते हैं कई तरह परिणाम - फोटो : amar ujala

विस्तार

वैदिक ज्योतिष में मंगल रक्त और ऊर्जा का कारक हैं। इसे ग्रहों का सेनापति भी कहा गया है। आज इस लेख में हम समझते है कि मंगल की अन्य ग्रहों के साथ युति क्या फल देती है। 
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मंगल और सूर्य - इस युति को ज्योतिष में ग्रहण योग कहा जाता है। इस युति के कारण जातक के पिता से मतभेद रहते हैं वहीं संपत्ति का लाभ भी नहीं मिलता है। हालांकि दशम भाव में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं। 
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मंगल और चंद्र - इस युति को ज्योतिष में लक्ष्मी योग कहा गया है। इस युति के प्रभाव से जातक मन का बलवान और धनवान होता है। उसे व्यापार से लाभ होता है। 
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मंगल और बुध - इस युति को भी ज्योतिष में शुभ कहा गया है। इस युति के प्रभाव से जातक जातक राजनीति , लेखन और प्रकाशन में बढ़िया नाम कमाता है। ऐसा व्यक्ति तकनीक का भी अच्छा जानकार होता है। 

मंगल और गुरु-  इस युति के जातक को बेहद अच्छे परिणाम मिलते हैं। इस युति में गुरु और मंगल की ऊर्जा को दिशा देने का काम करता है। ऐसा व्यक्ति न्यायप्रिय और धर्म का जानकार होता है। ऐसे लोग अच्छे शिक्षक होते हैं। 

मंगल और शुक्र - इस युति से काम वासना में वृद्धि होती है। यहां मंगल सहज नहीं रहता और जातक का अधिकतम समय स्त्री भोग में निकल जाता है। इस युति पर पाप प्रभाव हो तो जातक कामी, भोगी और हिंसक होता है। 

मंगल और शनि - यह युति देर से सफलता देती है। अगर शुभ है तो जातक अच्छा इंजीनियर और बड़ा ठेकेदार होता है। अगर अशुभ हो तो जातक के बड़े शत्रु होते हैं और कर्जे की भी समस्या बनी रहती है। 


मंगल और राहु - ज्योतिष में इसे अंगारक योग कहा जाता है। यहां मंगल का क्रोध राहु के छल से मिलकर लोगों को ठगने का कार्य करता है। ऐसे लोग झूठ अच्छा बोलते हैं। अति उत्साह में काम बिगड़ जाता है और संपत्ति का नाश भी करते हैं। 

मंगल और केतु- वैदिक सूत्र के अनुसार केतु मंगल के ही समान फल करता है। इस युति के होने से जातक को आध्यात्म में अच्छी तरक्की मिल सकती है। जातक उच्च कोटि का शोधकर्ता भी हो सकता है लेकिन अशुभ युति होने पर जातक को चोट लगती है और कुछ ना कुछ बीमारी लगी रहती है।

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