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Astrology: क्या सप्तम भाव में सूर्य वाकई विपरीत परिणाम देता है ?

Tue, 07 Feb 2023 05:18 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 07 Feb 2023 05:18 PM IST
सार

सप्तम भाव में सूर्य हो तो जातक अपने पार्टनर को खुद से दूर नहीं जाने देता और उससे अत्यधिक प्रेम की उपेक्षा करता है।

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according to astrology 7th house importance and impact on sun in this house
कालपुरुष की कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य नैसर्गिक रूप से नीच का माना गया है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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  • वैदिक ज्योतिष में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव केंद्र भाव कहे गए हैं। माना जाता है कि ये कुंडली के सबसे बलवान भाव हैं लेकिन सप्तम भाव को लेकर हमेशा से विद्वानों में मतभेद रहा है। दरअसल यह भाव मारकेश भी है और विवाह का भी कारक है । ऐसे में सप्तम भाव में बलवान ग्रह जब आएगा तो वो किसका फल करेगा ये विचारणीय है ! उसमे भी सूर्य को लेकर मतभेद बेहद अधिक है। ऐसा माना जाता है कि सप्तम भाव में बैठा सूर्य बेहद प्रभावशाली होता है और जीवन को बदलकर रख देता है।
  • दरअसल सूर्य ग्रहों का राजा है और लग्न पर उसकी दृष्टि जातक को बेहद खूबसूरत और प्रभावशाली बना देती है। सप्तम भाव में जब सूर्य विराजमान होता है तो ऐसा व्यक्ति अपने पार्टनर को लेकर बेहद भावुक हो जाता है। उसकी कोशिश रहती है कि वो अपने पार्टनर पर पूरा नियंत्रण रखें। चूंकि सप्तम भाव का सूर्य खुद प्रतिभा देता है इसलिए व्यक्ति की कामना होती है कि उसका पार्टनर भी वैसा ही हो। अब ऐसे में सूर्य को यहां अच्छा फल देना चाहिए लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि सप्तम का सूर्य विवाह के बाद कलह का कारण बनता है। उसमे भी अगर सूर्य राहु केतु शनि से पीड़ित हो तो पति पत्नी मृत्यु समान कष्ट भोगते हैं। 
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  • दरअसल, कालपुरुष की कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य नैसर्गिक रूप से नीच का माना गया है। ऐसे में इस भाव में सूर्य की ऊर्जा पूर्ण रूप से प्रकट नहीं हो पाती और विवाह कष्टकारक हो जाता है। दूसरी ओर सूर्य अहंकार का भाव भी देता है जिससे एक पार्टनर दूसरे पार्टनर को काबू करने की इच्छा रखता है जिससे मतभेद बढ़ जाते है। ऐसे में धीरे 2 रिश्ते में विद्रोह के सुर पनपने लग जाते है। 
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  • सप्तम भाव में सूर्य हो तो जातक अपने पार्टनर को खुद से दूर नहीं जाने देता और उससे अत्यधिक प्रेम की उपेक्षा करता है। ऐसा देखा जाता है कि व्यक्ति अपनी ओर से रिश्ते में पूरी ऊर्जा और समय लगाता है लेकिन उसकी इच्छा कभी पूरी नहीं होती।
  •  सप्तम भाव काम का भी भाव है, ऐसे में इस भाव में सूर्य कामेच्छा को पूरी नहीं होने देता है। सप्तम भाव अनजान लोगों को दर्शाता है ऐसे में कई बार यह भी अनुभव में आता है कि व्यक्ति किसी ओर के द्वारा पैदा की गई समस्या के कारण खुद तकलीफ में आ जाता है। कुल मिलाकर सप्तम भाव भले ही केंद्र का एक भाग है लेकिन यहां बाकी केंद्र की तरह शुभ परिणाम नहीं मिलते है।
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