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शुक्र के बाद गुरु का अस्त होना शुभ संकेत नहीं, जानें क्या होगा परिणाम

कुंभ की स्नान तिथियों के करीब आते तक कुशावर्त क्षेत्र पर पुण्य स्नान करने वालों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है, देश के ख्यातिप्राप्त कथावाचकों, धर्माचार्यों, साधू-संतो, अखाड़ों, शंकराचार्यों और अन्य पीठाधीश्वरों के पांडाल सज चुके हैं।

सूर्य, चन्द्र और बृहस्पति के संयोग से बनने वाला यह कुम्भपर्व प्राणियों को जीवन-मरण के बंधन से मुक्त करने वाला माना जाता है। इधर 5 अगस्त को शुक्र और बृहस्पति 12 अगस्त को अस्त हो रहे हैं। शुक्र का अस्त होना कांति और कला से जुड़ें लोगों के लिए, खासतौर पर फिल्म इंडस्ट्री के लिए अशुभ रहेगा तो बृहस्पति का अस्त होना देश में राजनैतिक अस्थिरता देगा। राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ेगा।

यह संयोग साधुसंतो के लिए भी अच्छे संकेत नहीं दे रहा। प्रशासन को कुंभ मेले में सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। गुरु और शुक्र का अस्त होना प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि तो कराएगा ही, राजनैतिक एवं सामाजिक अराजकता भी बढ़ेगी।
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