जिस तरह सेटेलाईट से बदलते
मौसम की जानकारी मौसम वैज्ञानिकों को समय से पहले मिल जाती है ठीक उसी तरह सूर्य के
रत्न माणिक्य में यह खूबी है कि यह आने वाली संकट की सूचना पहले दे देता है।
ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि, माणिक्य के विषय में मान्यता है
कि जो व्यक्ति इसे धारण करता है वह अगर गंभीर रूप बीमार होने वाला होता है तो इसका
रंग फीका हो जाता है।
अगर व्यक्ति की मृत्यु होने वाली होती है तो करीब तीन
महीने पहले से माणिक्य का रंग सफेद होने लग जाता है।
माणिक्य के विषय में
यह भी मान्यता है कि पति-पत्नी दोनों अगर इसे धारण करते हैं तो पत्नी के बेवफाई
करने पर पति द्वारा धारण किये गये माणिक्य का रंग फीका पड़ जाता है।
ठीक
इसी तरह पति बेवफाई करे तो पत्नी द्वारा धारण किये गये माणिक्य का रंग फीका पड़
जाता है। माणिक्य में रक्त संबंधी रोगों को दूर करने की क्षमता है। तपेदिक से
पीड़ित व्यक्ति अगर इसे धारण करे तो चिकित्सा का लाभ तेजी से प्राप्त होता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिनकी राशि अथवा लग्न सिंह, मेष, वृश्चिक, कर्क
एवं धनु है उनके माणिक्य रत्न धारण करना बहुत ही शुभ होता है।
इसे धारण
करने से दूषित विचारों को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है। धार्मिक आस्था एवं
पद-प्रतिष्ठा का लाभ मिलता है।
असली माणिक्य की पहचान
प्राप्ति
स्थान के अनुसार माणिक्य लाल, गुलाबी, रक्तवर्णी, फिका गुलाबी इत्यादि रंगों में
पाया जाता है।
दूध में असली माणिक्य रखने पर दूध का रंग गुलाबी दिखाई देता
है। कांच के बरतन में इसे रखने से बरतन के चारों ओर हल्की किरण निकलती दिखाई देती
है।
कैसे धारण करें
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बिना अभिमंत्रित किये
माणिक्य धारण करने से इसका पूरा लाभ नहीं मिलता है। इसलिए इसे धारण करने से पहले
सूर्य देव की पूजा करें
साथ ही "ओम् ह्रां ह्रीं, ह्रौं सः सूर्याय नमः"
मंत्र का जप करें। इसके बाद रत्न धारण करें। कृतिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
अथवा रविपुष्य नक्षत्र में रविवार का दिन इस रत्न को धारण करना उत्तम होता है।