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धनवान और ऊंचे पद पर होते हैं ऐसे लोग

राकेश/इंटरनेट डेस्क

ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिस व्यक्ति का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में होता है उनकी वाणी कोमल व मधुर होती है। इस नक्षत्र पर गुरू का प्रभाव होता है इसलिए इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का शरीर भारी-भरकम होता है। इनकी याददाश्त बड़ी अच्छी होती।

27 नक्षत्रों में इसका स्थान सातवां है। ऐसी मान्यता है कि पुनर्वसु नक्षत्र में जिनका जन्म होता है उनमें कुछ दैवी शक्तियां होती है। समय-समय पर इन्हें ईश्वरीय कृपा का लाभ मिलता रहता है। अपने नेक और सरल स्वभाव के कारण यह समाज में मान-सम्मान और आदर प्राप्त करते हैं। पढ़ने-लिखने में यह काफी होशियार होते हैं।

अपनी योग्यता के बल पर सरकारी क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम तीन चरण मिथुन राशि में स्थित होते हैं तथा चौथा चरण कर्क राशि में होता जिसके कारण इस नक्षत्र पर मिथुन राशि तथा इसके स्वामी ग्रह बुध और कर्क राशि तथा इसके स्वामी चन्द्रमा का भी प्रभाव पड़ता है।

बुध और गुरू के प्रभाव के कारण यह आर्थिक मामलों के अच्छे जानकार होते हैं, वित्त सम्बन्धी क्षेत्र यह सफलता प्राप्त करते हैं। प्रबंधन एवं व्यवसाय में भी इन्हें अच्छी सफला मिलती है। आमतौर पर इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं। इनका पारिवारिक और वैवाहिक जीवन सुखद होता है। इनके बच्चे शिक्षित और समझदार होते हैं।
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