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Astrology: ज्योतिष में क्या है चंद्रमा का महत्व और क्यों की जाती है चंद्रमा की पूजा ?

Mon, 11 Sep 2023 02:29 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 11 Sep 2023 02:29 PM IST
सार

पूर्णिमा पर चंद्रमा की उपासना करना विशेष फलदायी होती है। इससे सुख-समृद्धि के साथ शांति की प्राप्ति होती है, सभी कष्ट दूर होते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।

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astrology what is role of moon in astrology and puja importance and significance
नवग्रहों में चंद्रमा को शीतलता और शांति का सूचक माना गया है। कुंडली में चंद्रमा की अच्छी स्थिति व्यक्ति के मन को शांत रखती है। - फोटो : iStock

विस्तार

ज्योतिष में कुल नौ ग्रह बताए गए हैं। इन नौ ग्रहों में चंद्र सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह है। ये ग्रह हर ढाई दिन में राशि बदलता है। पुराणों की एक कथा के अनुसार जब ब्रह्माजी सृष्टि की रचना कर रहे थे तब उन्होंने अपने मानस पुत्र ऋषि अत्रि को उत्पन्न किया। ऋषि अत्रि का विवाह कर्दम मुनि की कन्या अनसूया से हुआ था। अत्रि और अनसूया के तीन पुत्र थे। दुर्वासा ऋषि, भगवान दत्तात्रेय और सोम यानी चंद्र। चंद्रदेव का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। इन कन्याओं के नाम पर ही 27 नक्षत्र बताए गए हैं। चंद्र जब इन 27 नक्षत्रों का चक्कर लगा लेता है, तब एक मास पूरा होता है।

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मन को शांत रखता हैं चन्द्रमा
नवग्रहों में चंद्रमा को शीतलता और शांति का सूचक माना गया है। कुंडली में चंद्रमा की अच्छी स्थिति व्यक्ति के मन को शांत रखती है। मन शांत होने से सभी सुखों का अनुभव होता है, इसलिए चंद्रमा को शांत रखने के लिए शास्त्रों में उपाय बताए गए हैं। पूर्णिमा पर चंद्रमा की उपासना करना विशेष फलदायी होती है। इससे सुख-समृद्धि के साथ शांति की प्राप्ति होती है, सभी कष्ट दूर होते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
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इसलिए की जाती हैं चन्द्रमा की पूजा
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, जो मन की चंचलता को नियंत्रित करता है। हमारे शरीर में दोनों भौहों के मध्य मस्तक पर चंद्रमा का स्थान माना गया है। यहां पर महिलाएं बिंदी या रोली का टीका लगती हैं,जो चंद्रमा को प्रसन्न कर मन का नियंत्रण करती हैं।भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र की उपस्थिति उनके योगी स्वरुप को प्रकट करती है। अर्धचंद्र को आशा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है ।पुराणों में उल्लेख है कि सौभाग्य,पुत्र,धन-धान्य,पति की रक्षा एवं संकट टालने के लिए चंद्रमा की पूजा की जाती है।
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चंद्रमा की पूजा का एक अन्य कारण यह भी है कि चंद्रमा औषधियों और मन के अधिपति देवता हैं। उसकी अमृत वर्षा करने वाली किरणें वनस्पतियों और मनुष्य के मन पर सर्वाधिक प्रभाव डालती हैं। दिन भर उपवास के बाद चतुर्थी के चंद्रमा को छलनी की ओट में से  जब नारियां देखती हैं,तो उनके मन पर पति के प्रति अनन्य अनुराग का भाव उत्पन्न होता है,उनके मुख व शरीर पर एक विशेष कांति आ जाती है।इससे महिलाओं का यौवन अक्षय,स्वास्थ्य उत्तम और दांपत्य जीवन सुखद हो जाता है। उपनिषद के अनुसार जो व्यक्ति चंद्रमा में पुरुषरूपी ब्रह्म को जानकार उसकी उपासना करता है,वह उज्जवल जीवन व्यतीत करता है। उसके सारे कष्ट दूर होकर सभी पाप नष्ट हो जाते हैं एवं वह लंबी आयु पाता है।चंद्रदेव की कृपा से उपासकों की इस लोक और परलोक में रक्षा होती है।

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