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जानिए कुंडली में मौजूद मांगलिक, कालसर्प समेत सभी दोषों के बारे में...
Fri, 12 Mar 2021 07:50 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 12 Mar 2021 07:50 AM IST
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वैदिक ज्योतिषशास्त्र में किसी जातक की कुंडली का विशेष महत्व होता है। कुंडली को जन्मपत्री या पत्रा भी कहा जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
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वैदिक ज्योतिषशास्त्र में किसी जातक की कुंडली का विशेष महत्व होता है। कुंडली को जन्मपत्री या पत्रा भी कहा जाता है। कुंडली में जातक के जन्म की तारीख, जन्मस्थान और समय के आधार पर ग्रह नक्षत्रों की गणना के आधार पर कुंडली में मौजूद गुण-दोषों के बारे में पता लगाया जाता है। जातक की कुंडली में दोष होने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों आती है। आइए जानते हैं कुंडली में मौजूद दोषों के बारे में....
मंगल ग्रह
- फोटो : Pixabay
मांगलिक दोष
जब कुंडली में लग्न भाव, चौथे भाव,सातवें भाव, आठवें और दसवें भाव में मंगल स्थित होता है तब कुंडली में मंगल दोष बनता है। मंगल दोष से व्यक्ति को विवाह संबंधी परेशानियां, रक्त संबंधी बीमारियों और भूमि-भवन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
जब कुंडली में लग्न भाव, चौथे भाव,सातवें भाव, आठवें और दसवें भाव में मंगल स्थित होता है तब कुंडली में मंगल दोष बनता है। मंगल दोष से व्यक्ति को विवाह संबंधी परेशानियां, रक्त संबंधी बीमारियों और भूमि-भवन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
kaal
कालसर्प दोष
राहु-केतु के कारण कालसर्प दोष बनता है। कुंडली में कालसर्प दोष बनने पर जातक को संतान और धन संबंधी परेशानियां आने लगती है और जीवन में उतार-चढ़ाव आता है।
राहु-केतु के कारण कालसर्प दोष बनता है। कुंडली में कालसर्प दोष बनने पर जातक को संतान और धन संबंधी परेशानियां आने लगती है और जीवन में उतार-चढ़ाव आता है।
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shanidev
शनि दोष
कुंडली में शनि दोष को बहुत ही अशुभ दोष माना जाता है शनि दोष होने पर व्यक्ति को समाज में अपमान होना पड़ता है। शनि दोष होने पर अपयश, नौकरी और व्यापार में नुकसान उठाना पड़ता है।
कुंडली में शनि दोष को बहुत ही अशुभ दोष माना जाता है शनि दोष होने पर व्यक्ति को समाज में अपमान होना पड़ता है। शनि दोष होने पर अपयश, नौकरी और व्यापार में नुकसान उठाना पड़ता है।
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pitru
पितृदोष
कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में दो कोई दो एक ही घर में मौजूद हो। पितृदोष होने पर संतान संबंधी तमाम तरह की परेशानी आती है। मान्यता के अनुसार पितरों का दाह-संस्कार सही ढ़ग से ना होने पर पितर नाराज रहते हैं जिसके कारण जातक को परेशानी झेलनी पड़ती है।
कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में दो कोई दो एक ही घर में मौजूद हो। पितृदोष होने पर संतान संबंधी तमाम तरह की परेशानी आती है। मान्यता के अनुसार पितरों का दाह-संस्कार सही ढ़ग से ना होने पर पितर नाराज रहते हैं जिसके कारण जातक को परेशानी झेलनी पड़ती है।