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टिहरी के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ेंगे एआई का पाठ, IIT मद्रास की टीम दे रही शिक्षकों को प्रशिक्षण

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टिहरी जनपद में नई पहल शुरू की गई है। विद्या शक्ति कार्यक्रम के तहत आईआईटी मद्रास की टीम टिहरी जनपद के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रशिक्षण दे रही है। पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है और इसके बाद कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को एआई की जानकारी दी जाएगी, शुक्रवार को भिलंगना के बालगंगा इंटर कॉलेज केमरा केमर में 45 शिक्षकों को एआई की ट्रैनिंग दी गई जबकि इससे पहले टिहरी के जिला शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में भी 50 से अधिक शिक्षकों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस वर्कशॉप में अलग-अलग स्कूलों से कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले 45 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। विद्या शक्ति केंद्र आईआईटी मद्रास की ग्लोबल कन्वेनर शिवा सुब्रमण्यम और प्रोजेक्ट डायरेक्टर नागराजन ने शिक्षकों को एआई शिक्षा, सिमुलेशन और गेमिफिकेशन पर आधारित तकनीकों के बारे में बताया। प्रशिक्षण के दौरान यह समझाया गया कि नई तकनीकों से गणित और विज्ञान समेत दूसरे विषयों के कठिन कॉन्सेप्ट्स को स्टूडेंट्स के लिए सरल, सहज और दिलचस्प बनाया जा सकता है। आईआईटी मद्रास के सहयोग से शुरू हुई यह पहल टिहरी के सरकारी स्कूलों को तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी एआई और आधुनिक तकनीक की जानकारी मिलेगी और वे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्मार्ट शिक्षा से जुड़ सकेंगे। विद्या शक्ति प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ नागराजन ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान 45 शिक्षकों को सिमुलेशन, वर्चुअल लैब और एआई की तकनीकी जानकारी दी गई। शिक्षकों को गणित सहित विभिन्न विषयों को तकनीक और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के तरीके बताए गए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका है और आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए इसकी जानकारी बेहद जरूरी होगी। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. शिवा सुब्रमण्यम ने बताया कि टिहरी जनपद के अलग-अलग ब्लॉकों में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण में शिक्षकों को एआई के उपयोग और इसके फायदे बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे आगे विद्यालयों में बच्चों को एआई की जानकारी दे सकें। प्रशिक्षण में शामिल शिक्षक राजेश कंडवाल ने बताया कि आईआईटी मद्रास की ओर से दी गई ट्रेनिंग काफी उपयोगी रही। इसमें विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषयों से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि पहले पढ़ाई में गतिविधियों का उतना इस्तेमाल नहीं हो पाता था, लेकिन तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को कम समय में विषय को बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई प्रशिक्षण लिए हैं, लेकिन पिछले दस वर्षों में आईआईटी मद्रास की यह ट्रेनिंग सबसे बेहतर रही। शिक्षक संदीप थपलियाल ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कई नई चीजें सीखने को मिली हैं, जिन्हें अब बच्चों की पढ़ाई में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से विद्या शक्ति एप भी शुरू किया गया है, जिसका विद्यालयों में उपयोग किया जा रहा है। एआई और 3डी तकनीक के माध्यम से कठिन विषयों को बच्चों को आसानी से समझाया जा सकता है, जिससे बच्चे जल्दी और बेहतर तरीके से सीख सकेंगे। उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में विकसित तकनीक के उपयोग से भारतीय डेटा की सुरक्षा को भी प्राथमिकता मिलती है। टिहरी की सीडीओ वरुणा अग्रवाल ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से आईआईटी मद्रास के साथ एमओयू किया गया है। इसी के तहत शिक्षकों को एआई से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ना और उसका उपयोग विद्यार्थियों की पढ़ाई को आसान व प्रभावी बनाने में करना है। आज के समय में तकनीक आधारित शिक्षा बहुत जरूरी है। एआई और डिजिटल माध्यमों का सही इस्तेमाल शिक्षकों को मुश्किल विषयों को स्टूडेंट्स तक आसानी से पहुंचाने में मदद कर सकता है। ऐसे प्रशिक्षण से शिक्षकों की क्षमता तो बढ़ेगी ही, साथ ही स्टूडेंट्स में सीखने की रुचि और जिज्ञासा भी पैदा होगी।

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