जिला पंचायत सभागार में केदारघाटी मनन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की आर्थिकी, स्वरोजगार, पर्यटन व सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने पर मंथन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री डा, अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि केदारनाथ धाम विश्व प्रसिद्ध आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा योजनाबद्ध तरीके से स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों, हस्तशिल्प व सांस्कृतिक विरासत को यात्रियों तक पहुंचाया जाए। इससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कार्य करे। उन्होंने कहा कि केदारघाटी की संस्कृति, लोककला, पारंपरिक भोजन व जैविक उत्पाद की विशेष पहचान है। कार्यशाला में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि केदारनाथ धाम यात्रा में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जाने वाले प्रसाद को बड़े स्तर पर बढ़ावा देकर महिलाओं की आर्थिकी को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने जलागम विभाग के अधिकारियों से कहा बंजर भूमि पर बांस का रोपण करे। उन्होंने कहा इसे जंगली जानवरों से भी नुकसान नहीं होता। बांस आधारित उद्योगों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उ जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने कहा कि केदारघाटी में धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, प्रशिक्षण, विपणन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है।