सलाखों के पीछे कैद भाई की कलाई पर रक्षाबंधन के दिन जब बहन ने राखी बांधी तो आंखों में खुशी के साथ दर्द भी छलक आया। रेशम की डोर में बंधा प्यार जैसे कुछ पल के लिए जेल की चहारदीवारी और कैद की पीड़ा को भुला गया। बहनों की जुबां पर भाई की लंबी उम्र के साथ ही उनकी जल्द रिहाई की दुआ भी थी। रक्षाबंधन पर हल्द्वानी उप कारागार में आम दिनों से अलग माहौल नजर आया। सुबह से ही अलग-अलग क्षेत्रों से बहनें यहां बंद भाइयों से मिलने पहुंचने लगीं। जेल प्रशासन ने त्योहार को देखते हुए मुलाकात के लिए विशेष इंतजाम किए और सामान्य दिनों की दो पालियों के बजाय चार पालियों में कैदियों से मुलाकात कराई गई। हल्द्वानी उप कारागार में महिला और पुरुष मिलाकर कुल 974 कैदी हैं। इनमें 900 से अधिक पुरुष कैदी हैं। रक्षाबंधन के मौके पर बहनों से हुई मुलाकात में किसी की आंखें नम थीं तो किसी के चेहरे पर लंबे समय बाद भाई को देखकर मुस्कान थी।जेल प्रशासन की ओर से कैदियों और उनके परिजनों के लिए मिठाई और राखी की भी व्यवस्था की गई थी। सुबह 11 बजे से शाम चार बजे के बाद तक बहनों के लिए मुलाकात की व्यवस्था रही। रक्षाबंधन के दिन करीब 700 से अधिक लोग त्योहार मनाने जेल पहुंचे। सामान्य दिनों में दो पालियों में होने वाली मुलाकात को पर्व को देखते हुए चार पालियों में कराया गया ताकि अधिक से अधिक बहनें अपने भाइयों से मिल सकें। - प्रमोद पांडे, जेलर