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धर्म भाई लाटू और केदारू से मिलीं मां दशमद्वार, दो दशक के बाद आयोजित हुआ नंदाष्टमी कौथिग

कर्णप्रयाग। विकासखंड के कोट-कंडारा में नंदाष्टमी कौथिग का बृहस्पतिवार को पारंपरिक पूजा अर्चना और देव डोलियों तथा निशानों के मिलन के साथ शुभारंभ हुआ। देव मिलन को देखने के लिए यहां भारी संख्या में लोग पहुंचे। चार दिनों तक यहां अब देव अनुष्ठान होंगे। बृहस्पतिवार सुबह हिंडाली स्थित मां दशमद्वार के मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हुई जबकि नौली के लाटू और स्वर्का के केदारू देवता के मंदिर में पूजा हुई। हिंडाली से दशमद्वार की डोली, नौली से लाटू देवता और स्वर्का से केदारू देवता का निशान कोट कंडारा के दयोल मंदिर के लिए रवाना हुए। स्वर्का से पुजारी और ग्रामीण केदारू देवता के निशान को लेकर उल्फाड़ा, ढुंग-ल्वाली आदि गांवों से होते हुए करीब सात किमी की पैदल दूरी तय कर कोट-कंडारा पहुंचे। यहां लाटू और केदारू से मां दशमद्वार का मिलन हुआ। इस दौरान अपने भाइयों से दशमद्वार के मिलन पर देवताओं के पश्वाओं ने ढोल दमाऊं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर देवनृत्य किया। महिलाओं ने जागर गाए। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष गजपाल कठैत, सचिव धर्मेंद्र रावत, लक्ष्मण सिंह, मनोज रावत, सतेंद्र बिष्ट, जिपंस सरोजनी देवी आदि मौजूद रहे। राजजात के वापसी मार्ग पर विकास की मांग थराली। देवराड़ा मंदिर समिति ने जिलाधिकारी, राजजात समिति और सरकार से श्रीनंदा देवी राजजात के वापसी पड़ावों पर विकास कार्य कराने की मांग उठी। समिति अध्यक्ष भुवन हटवाल ने कहा कि जाने वाले पड़ावों पर धनराशि मिली मगर वापसी मार्ग की अनदेखी हुई। मां नंदा की डोली होमकुंड से छह माह के लिए देवराड़ा पहुंची है लेकिन देवी के वापसी के पड़ावों पर सुविधाएं नहीं है। संवाद कालिंका की पूजा के लिए पहुंच रहे हैं लोग गौचर। चार दिवसीय प्रवास पर पनाई सेरा मंदिर पहुंची कालिंका देवी की पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु मां कालिंका को वस्त्र, शृंगार सामग्री सहित अन्य सामग्री भेंट कर रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश कनवासी ने बताया कि मंदिर में जागरण भी किया जा रहा है।

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