एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर की ओर से एमएसएमई विकास पर बुधवार को परिक्षेत्रीय उद्योग कार्यालय सभागार, एचबीटीयू में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें एमएसएमई इकाइयों को आयात, निर्यात, सरकारी विभागों में खरीद प्रक्रिया, ई-मार्केट और विभिन्न ई-कामर्स प्लेटफार्म की जानकारी दी गई। इस दौरान उद्यमियों ने समस्याओं की झड़ी लगा दी। जेम-पोर्टल की खामियां बताईं। कहा कि जेम पोर्टल पर विभागों और सप्लायरों की जुगलबंदी खत्म कराई जाए। ताकि इसका वास्तविक लाभ उद्यमियों को मिल सके। फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने कहा कि जेम पोर्टल पर खरीदारी करने से पहले विभागों और तथाकथित सप्लायरों में साठगांठ हो जाती है। जिससे आम उद्यमी जेम के माध्यम से अपने उत्पाद सरकारी संस्थाओं को नहीं बेच पा रहा। यह जुगलबंदी समाप्त होनी चाहिए और उद्यमियों को बिना किसी रुकावट के अपना माल बेचने की पूरी छूट होनी चाहिए। निर्यात के लिए बहुत सारे उद्यमी तैयार हैं, लेकिन उन्हें सही तरीके से जानकारी नहीं मिलती है कि वो वस्तुओं को कहां निर्यात कर सकते हैं। और उनका रुपया कहां सुरक्षित रह सकता है। उद्यमियों को डीजीएफटी की तरफ से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। ई- मार्केट और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म को सरकार बढ़ावा दे रही है। जो अच्छी बात है लेकिन इसके साथ-साथ परंपरागत व्यापार-उद्योग का भी ध्यान रखना होगा। ताकि इनका अस्तित्व भी बना रहे। अन्यथा विदेशी कंपनियां हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर काबिज हो जाएंगी। एमएसएमई पॉलिसी 2022 बहुत अच्छी है लेकिन सब्सिडी आसानी से उद्यमियों को नहीं मिल पा रही। चमड़ा उद्योग कानपुर की ही नहीं देश की शान है और माघ मेले के दौरान 3 महीने तक उन उद्योगों को बंद करना उचित नहीं है। इसके लिए अन्य कोई इंतजाम किया जाना चाहिए। और उद्योगों को चलते रहने देना चाहिए। नहीं तो मजदूर पलायन कर जाते हैं और उद्योग को बहुत नुकसान होता है। उद्यमियों ने कहा कि आज सरकार एमएसएमई को बैंक के माध्यम से वित्तीय सुविधा देने की बात करती है लेकिन आज भी नए उद्यमियों को 3 साल तक बैंक ऋण नहीं देते हैं। और जो ग्राहक बैंक को पसंद होता है उसी को ऋण मिलता है। इसके लिए लीड बैंक मैनेजर और एमएसएमई विभाग को मिलकर एक मजबूत कार्य योजना बनानी चाहिए। मुख्य अतिथि, संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक कानपुर आलोक द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश से होने वाले वैश्विक निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। हस्तशिल्प, टेक्स्टाइल, लेदर, एग्रो-उत्पाद और एमएसएमई उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास पहचान बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने वैश्विक व्यापार और निर्यात के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए पहली बार 2.01 लाख करोड़ का निर्यात आंकड़ा पार कर लिया है। देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में उत्तर प्रदेश का योगदान 5.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जिससे यूपी देश का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।