रिपोर्ट- उवैश रहमान; बाघ की तलाश में जंगल के रास्तों पर सफारी, पेड़ों के बीच वन्यजीवों की आहट और गेरुआ नदी में डॉल्फिन की अठखेलियां। बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में एक नवंबर से शुरू होने जा रहा नया पर्यटन सत्र पर्यटकों को फिर से प्रकृति के करीब पहुंचने का मौका देगा। इस बार जंगल सफारी और वन्यजीवों के दीदार के साथ नया सेल्फी प्वाइंट भी सैलानियों को आकर्षित करेगा। वहीं, घड़ियाल केंद्र के सामने निर्माणाधीन व्याख्यान केंद्र वन्यजीवों के बारे में जानकारी देने का नया माध्यम बनेगा। हालांकि, पर्यटन सत्र की शुरुआत में गेरुआ नदी में पानी कम होने के कारण पर्यटकों को नौका विहार के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। पर्यटन सत्र शुरू होने की तारीख नजदीक आते ही वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जंगल के मुख्य मार्गों से लेकर कच्चे रास्तों तक की सफाई कराई जा रही है। घड़ियाल केंद्र और नावघाट को व्यवस्थित करने के साथ थारू हट, कैंटीन और रेस्ट हाउस की रंगाई-पुताई का काम भी चल रहा है। विभाग का प्रयास है कि पर्यटकों को जंगल में भ्रमण के दौरान बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कतर्नियाघाट की पहचान घने जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्यजीव संसार से है। यहां जंगल सफारी के दौरान बाघ और तेंदुए को देखने की उम्मीद में पर्यटक पहुंचते हैं। जंगल में हाथियों की आवाजाही के साथ गेरुआ नदी में डॉल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छ भी आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी यहां आते हैं। इस पर्यटन सत्र में पर्यटकों को कतर्नियाघाट के नाम से तैयार किए गए लकड़ी के आकर्षक बोर्ड के पास तस्वीरें खिंचवाने का अवसर मिलेगा। विभाग ने यहां सेल्फी प्वाइंट तैयार किया है। इसके अलावा घड़ियाल केंद्र के सामने घड़ियाल व्याख्यान केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूरा होने पर पर्यटकों को घड़ियाल के जीवन, व्यवहार और संरक्षण के बारे में जानकारी देने में मदद मिलेगी। कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटकों को इस बार शुरुआती दिनों में जंगल सफारी के साथ नौका विहार का पूरा आनंद नहीं मिल सकेगा। घाघरा बैराज की क्लोजर अवधि के चलते गेरुआ नदी में पानी का स्तर कम हो गया है। ऐसे में नावों का संचालन शुरू करने में परेशानी आ रही है। अनुमान है कि पानी का स्तर अनुकूल होने तक शुरुआती एक से दो सप्ताह बोटिंग प्रभावित रह सकती है। इससे नदी में डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों को देखने की योजना बनाकर आने वाले पर्यटकों को इंतजार करना पड़ सकता है। पर्यटकों को जंगल के अधिक हिस्सों का भ्रमण कराने के लिए सफारी के नए रास्ते खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। नए मार्गों को अनुमति मिलने पर पर्यटकों को जंगल के अलग-अलग हिस्सों को देखने का अवसर मिल सकता है। डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि पर्यटन सत्र के लिए तैयारियां कराई जा रही हैं। इस बार पर्यटकों के लिए नया सेल्फी प्वाइंट तैयार किया गया है और घड़ियाल व्याख्यान केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि जंगल के रास्तों की सफाई, रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है, ताकि एक नवंबर से शुरू होने वाले पर्यटन सत्र में पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।