आगरा में निराश्रित कुत्ते लोगों पर हमले कर रहे हैं। इसके कारण इस साल 2,661 मरीजों को एंटी रेबीज सीरम लगाना पड़ा। इनमें कुत्तों द्वारा चेहरे और गर्दन पर काटने के घाव ज्यादा मिले हैं। चिकित्सक लोगों को सलाह दे रहे हैं कि कुत्ता काटने पर घरेलू इलाज के चक्कर में न पड़ते हुए 24 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाएं। उधर, लापरवाही बरतने पर तीन संदिग्ध मरीजों की मौत भी हो चुकी है। नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि रेबीज जूनोटिक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से होती है। 99 फीसदी मामले कुत्ता काटने के हैं। जिले में बीते साल 1.80 लाख लोगों को कुत्ते, बंदर और बिल्लियों ने काटा। इस साल 27 सितंबर तक 1.32 लाख मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। इनमें से हालत गंभीर होने पर 2,661 मरीजों को सीरम देना पड़ा। 2024 में सिर्फ चार और बीते साल 411 मरीजों को सीरम लगाया गया था। जिला अस्पताल के एंटी रेबीज वैक्सीन ओपीडी के प्रभारी डॉ. मोहित बंसल ने बताया कि बीते साल जानवरों के काटने के 3,619 मरीज अस्पताल में आए। इसमें से 2,390 को निराश्रित और 273 को पालतू कुत्तों ने काटकर घायल किया। 740 को बंदरों ने और 183 को बिल्ली ने काटा। बाकी चूहा, सियार आदि जानवरों के काटे हुए मरीज थे।