परिवार न्यायालय ने नाबालिग बच्चे की सुपुर्दगी उसकी मां के बजाय उसकी अम्मा (दादी) को सौंप दी। बच्चा एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जिसे विशेष देखभाल की आवश्यकता है। मां ने ही वर्ष 2021 में अपने पुत्र की सुपुर्दगी के लिए वाद दायर किया था। अदालत ने अम्मा को आदेश दिया है कि वह महीने में एक बार किसी सार्वजनिक स्थान पर बच्चे को उसकी मां से मिलवाए। बच्चे की मां ने अपनी सास के विरुद्ध संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम के तहत अदालत में मुकदमा किया था। आरोप लगाया था कि 2017 में पीड़िता की शादी हुई और 2020 में पुत्र पैदा हुआ। उसी वर्ष पति की मृत्यु के बाद सास ने उसे मायके भेज दिया। बच्चा सास के पास ही रह गया। सास पर अनेक आरोप लगाकर पुत्र की सुपुर्दगी मांग की। बच्चे की अम्मा ने अदालत में कहा कि मां बच्चे को पसंद नहीं करती थी और घर में क्लेश करती थी। उनका नाती दुर्लभ बीमारी से पीड़ित होने के कारण केवल तरल पदार्थों पर जीवित है। अम्मा ने आरोप लगाया कि मां ने पति की मृत्यु के बाद बीमार बच्चे की देखभाल करने से मना कर दिया था। मां ने भरण-पोषण के लिए 4 लाख 50 हजार रुपये प्राप्त किए थे। इसके अतिरिक्त, उसने पुत्र के बीमा के 12 लाख 50 हजार रुपये भी लिए थे। पति ने अपनी वसीयत में अम्मा को ही बच्चे का संरक्षक घोषित किया था। अदालत ने इन तर्कों पर विचार कर अम्मा के पक्ष में आदेश पारित किए।