कूट रचित दस्तारवेज व अन्य आरोपों के मुकदमे में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे खुद को कागज पर मुर्दा साबित करने के मामले में थाना हरीपर्वत क्षेत्र के गांधी नगर निवासी आरोपी ताराचंद शर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता ने निरस्त कर भेज दिया। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि के बीच कूटरचित दस्तावेज के आरोप में 1999 से मुकदमा लंबित चल रहा था। सुनवाई के दौरान आरोपी विद्या देवी, चुन्नी लाल गोयल और रोशन लाल वर्मा की मौत हो गई। कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी। मुकदमे में गांधी गनर निवासी आरोपी तारा चंद्र शर्मा के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने वर्ष 2013 में कोर्ट में नगर निगम से बना एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उसे 1998 में मृत दर्शाया गया था। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 13 अगस्त 2013 को इस पर आख्या दी। कोर्ट ने फर्जी मृत्यु प्रमाण व अन्य दस्तावेज और पुलिस आख्या को सही मानते हुए 20 सितंबर 2013 को आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी। गाैरतलब है कि थाना हरीपर्वत क्षेत्र के घटिया आजम खां निवासी वादी राजकुमार वर्मा ने आरोपी तारा चंद्र शर्मा को 5 नवंबर 2025 को गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटर चलाकर जाते हुए देखा। उन्होंने फोटो खींच ली। स्कूटर के नंबर से आरटीओ कार्यालय जाकर दस्तावेज निकलवाए। पता चला कि जिस आरोपी को कोर्ट ने 1998 में मृत मान लिया था। उसी आरोपी ने जुलाई 2016 में अपने नाम से नई स्कूटी पंजीकृत करवाई थी और वह बाकायदा बैंक खातों में मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल भी कर रहा है। उन्होंने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-6 की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर साक्ष्य पेश किए। कोर्ट ने थाना न्यू आगरा से आख्या मांग की थी। तब थाना न्यू के दारोगा मधुर कुशवाह ने कोर्ट के आदेश पर जांच कर आख्या प्रस्तुत की। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी तारा चंद्र शर्मा अपने घर पर जीवित पाया गया। आरोपी और उसके पुत्र की फोटो साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश किए थे।