शिमला शहर में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। मंगलवार को नगर निगम मेयर सुरेंद्र चौहान ने अधिकारियों और योजना से जुड़ी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रगति की समीक्षा की। बैठक में मेयर ने कंपनी से योजना के तहत अब तक किए गए कार्यों का विस्तृत ब्योरा मांगा। मेयर ने स्पष्ट रूप से पूछा कि योजना के तहत अब तक कितने नए पेयजल कनेक्शन दिए गए हैं, कितने कनेक्शन अभी लंबित हैं और योजना पर अब तक कितनी राशि खर्च की जा चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने तय लक्ष्य के मुकाबले वास्तविक प्रगति की जानकारी भी ली। बैठक में कंपनी से यह भी पूछा गया कि 24 घंटे पेयजल आपूर्ति योजना के तहत निर्धारित कार्यों में से कितना काम पूरा हो चुका है और कितना काम अभी बाकी है। मेयर ने योजना के सभी चरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों से रिकॉर्ड की जांच करने को कहा। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि शहर में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू करने की समयसीमा क्या है। मेयर ने कंपनी से इस संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा, ताकि शहरवासियों को योजना का लाभ मिलने की संभावित तारीख को लेकर स्थिति साफ हो सके। बैठक में योजना पर खर्च की गई राशि और धरातल पर हुए काम के बीच तालमेल की भी समीक्षा की गई। मेयर ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक खर्च किए गए पैसे के अनुरूप कितना काम वास्तव में पूरा हुआ है। इसके लिए योजना से जुड़े रिकॉर्ड, भुगतान और कार्य प्रगति की जांच करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना से संबंधित सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों का बारीकी से परीक्षण किया जाए। किसी भी स्तर पर काम में देरी, लापरवाही या रिकॉर्ड में अस्पष्टता सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि शहरवासियों को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाना नगर निगम की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे पेयजल आपूर्ति योजना शहर के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में योजना की प्रगति, कनेक्शन देने की स्थिति, लंबित कार्यों और खर्च की गई राशि का रिकॉर्ड खंगाला गया। अब कंपनी और अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर योजना की अगली प्रगति तय की जाएगी।