राजधानी के न्यू शिमला सेक्टर-4 स्थित शिमला डेवलपमेंट अथॉरिटी (एसडीए) फेज-2 में बुनियादी सुविधाओं की कमी से लोग परेशान हैं। आवासीय क्षेत्र में पैदल चलने के लिए फुटपाथ नहीं हैं और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते वाहन बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बने हुए हैं। वहीं, घरों की बालकनी तक पहुंचीं पेड़ों की टहनियां और मकानों के ऊपर से गुजरती बिजली की तारें भी चिंता का कारण हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी समस्याओं पर हिमुडा और नगर निगम की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। शहर में आवास की बढ़ती मांग और आबादी के दबाव को देखते हुए कई साल पहले इस क्षेत्र में नई आवासीय टाउनशिप विकसित की गई थी। हिमुडा ने यहां लोगों को फ्लैट और प्लॉट आवंटित किए, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि नियोजन की कमी के कारण उन्हें बुनियादी सुविधाओं के बजाय रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात से परेशान कुछ लोग अपने घर बेचने तक की योजना बना रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई घरों के बाहर पेड़ों की टहनियां बालकनी तक पहुंच गई हैं। इनके सहारे बंदर और लंगूर घरों में घुस जाते हैं। इससे खासकर बुजुर्गों को परेशानी होती है और कई लोग घरों से बाहर निकलने में भी असहज महसूस करते हैं। दूसरी ओर, घरों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। उनकी मांग है कि बिजली की तारों को भूमिगत करने और पेड़ों की टहनियों की उचित छंटाई की व्यवस्था की जाए। क्षेत्र में डीएवी स्कूल तक आने-जाने वाली बड़ी एचआरटीसी बसों के कारण कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवासीय सड़कों पर वाहनों की तेज रफ्तार से बच्चों और बुजुर्गों को पैदल चलने में डर लगता है। उन्होंने सड़कों पर स्पीड ब्रेकर लगाने और समय पर टारिंग करवाने की मांग की है। वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर पाल कोचड़ ने कहा कि डीएवी स्कूल में आने वाली गाड़ियां स्कूल का समय समाप्त होने के बाद भी दिनभर सड़कों के किनारे खड़ी रहती हैं। इससे स्थानीय लोगों को पार्किंग की समस्या होती है। उन्होंने स्कूल परिसर के पास अलग पार्किंग बनाने की मांग की, ताकि आवासीय क्षेत्र की सड़कों पर दबाव कम हो सके। वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव राजेश शर्मा ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस के लिए कोई अलग वैकल्पिक रास्ता नहीं है। पूरा यातायात एक ही सड़क से गुजरता है, जिससे जरूरत के समय परेशानी हो सकती है। उन्होंने हिमुडा और नगर निगम से वैकल्पिक सड़क की व्यवस्था करने और तेज रफ्तार वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग की। स्थानीय निवासी एके महाजन ने कहा कि हाईटेंशन बिजली लाइनों को भूमिगत किया जाना चाहिए, ताकि करंट लगने का खतरा कम हो। घरों के बाहर पेड़ों की टहनियों की छंटाई भी जरूरी है, क्योंकि टहनियां बालकनी तक पहुंचने से बंदर और लंगूर घरों में घुस जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है। सोसायटी में सार्वजनिक शौचालय और सामुदायिक केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय निवासी ऊषा सूद ने कहा कि क्षेत्र में सामुदायिक केंद्र और थियेटर बनाने के वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी कॉलोनी के टिप्परों की आवाजाही से शोर-शराबे और हादसों का खतरा बना रहता है। लोगों ने सोसायटी के पार्क बाहरी लोगों को बेचने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा, रेन शेल्टर में लगा वॉटर एटीएम कई साल से खराब पड़ा है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। नगर निगम के न्यू शिमला वार्ड की पार्षद निशा ठाकुर ने बताया कि क्षेत्र में अधिकांश कार्य पूरे कर लिए गए हैं। सड़कों की टारिंग के लिए टेंडर जारी किए गए हैं और जल्द ही सड़कों को पक्का करवाया जाएगा।