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पनबस-पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारी 21 अक्टूबर से करेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल, बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

पंजाब रोडवेज पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब (25/11) ने 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। यूनियन ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों की मांगों को लगातार लटकाने और बैठकों के बावजूद कोई ठोस फैसला नहीं लेने का आरोप लगाया है। हड़ताल के चलते राज्य में बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि पिछले छह महीनों में वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ मांगों को लेकर सात से आठ बैठकें हो चुकी हैं। हर बार यूनियन से दस दिन का समय मांगा गया, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों की एक भी मांग पूरी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पांच अक्टूबर को हुई अंतिम बैठक में सरकार ने 15 अक्टूबर तक लिए गए फैसलों को लागू करने और संबंधित नोटिफिकेशन जारी करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। 20 अक्टूबर से बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका रेशम सिंह गिल ने बताया कि सरकार की ओर से मांगों का समाधान नहीं किए जाने के विरोध में यूनियन ने 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का फैसला लिया है। इसके तहत 20 अक्टूबर को दोपहर बाद सभी बसों को वर्कशॉप में खड़ा किया जाएगा। इसके अलावा, रात्रिकालीन बस सेवाएं भी 20 अक्टूबर से बंद करने का ऐलान किया गया है। ऐसे में यात्रियों को आवागमन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 22 अक्टूबर को विधानसभा की ओर कूच करेंगे कर्मचारी यूनियन प्रधान ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में 22 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा की ओर कूच करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की, ताकि अपनी मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जा सके। मजदूर, कर्मचारी और किसान संगठनों से समर्थन की अपील रेशम सिंह गिल ने पंजाब की सभी मजदूर, कर्मचारी और किसान यूनियनों से भी अपील की कि वे कच्चे कर्मचारियों के संघर्ष में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को पक्का करने और अन्य लंबित मांगों का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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