पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और जिला प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। आयोग के तकनीकी सदस्य एसडी अत्री और तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर राहुल ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद बताया कि अमृतसर और तरनतारन में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह रोकने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अगले 10 से 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस दौरान विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। एसडी अत्री ने कहा कि पराली जलाने से निकलने वाले धुएं में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इसका असर पंजाब, हरियाणा के साथ दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता पर भी पड़ता है। आयोग राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और किसानों के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं को रोककर जीरो बर्निंग का लक्ष्य हासिल करना चाहता है। उन्होंने बताया कि अमृतसर में अब तक लगभग 62 प्रतिशत और तरनतारन में 52 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है। दोनों जिलों में कटाई का काम अन्य जिलों की तुलना में पहले शुरू हो जाता है। ऐसे में आगामी दिनों में पराली प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।