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एमपी: नेहा पच्चीसिया ने दिया दो नाबालिग बच्चों की मां होने का हवाला, हाईकोर्ट ने कहा-सरकार का पक्ष जानना जरूरी

Thu, 17 Sep 2026 08:24 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

फरार इनामी निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने दर्ज एफआईआर को निरस्त करने तथा अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से एफआईआर में रोक लगाए जाने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था। याचिकाकर्ता की तरफ कहा गया था कि वह दो नाबालिग बच्चों की मां है। हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने आवेदन की सुनवाई करते हुए कहा है कि अंतरिम और अंतिम राहत की मांग पर विचार करने से पहले राज्य के जवाब का इंतज़ार करना सही होगा। एकलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 21 सितम्बर को निर्धारित की है।

गौरतलब है कि कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ कुठला थाने में धोखाधडी सहित अन्य धाराओं में तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। कटनी पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। उन पर आरोप था कि कुठला थानान्तर्गत हत्या के अपराध में निर्धारित समय अवधि में चालान पेश नहीं करने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया था। इसके एवज में उन्होंने आरोपियों की जमीन बहुत कम दर में अपने एजेंट के नाम पर खरीदी है। उक्त जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी। जबकि उनके बैंक खाते में जमीन खरीदने से पहले महज कुछ हजार रुपये थे। उसके बैंक खाते में क्षितिज राज पात्रे ने राशि ट्रांसफर की थी। जिसके बाद एक करोड़ रुपये की जमीन का महज 15 से 20 लाख रुपये में खरीदी गई थी। विभागीय स्तर पर जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।

ये भी पढ़ें- नेहा पच्चीसिया: जमीन सौदे मामले में नेहा समेत तीन के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की मांग; विशेष न्यायालय में आवेदन

निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया तथा क्षितिज राज बारापात्रे ने अग्रिम जमानत के लिए जिला न्यायालय में आवेदन दायर किया था। जिला न्यायालय द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से दर्ज एफआईआर पर रोक लगाए जाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया गया था। आवेदन में कहा गया था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वे दो नाबालिग बच्चों की मां है और उनकी देखभाल और पालन-पोषण की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है। एकलपीठ ने बुधवार को आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। एकलपीठ ने गुरुवार को उक्त आदेश जारी किए।

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