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Video: लखनऊ में भूमिहीन किसान महिलाओं की स्थिति पर शोध रिपोर्ट जारी

सामाजिक समरसता मंच अवध प्रांत की ओर से विश्व संवाद केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश की भूमिहीन किसान महिलाओं और उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर पांच वर्षों के शोध पर आधारित रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांता के. माथुर ने तैयार की है, जबकि शोध कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक समरसता गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक के. श्याम प्रसाद के मार्गदर्शन में हुआ। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में केवल 7.6 प्रतिशत महिलाओं के नाम कृषि भूमि दर्ज है। वहीं 85 प्रतिशत महिला श्रमशक्ति खेती से जुड़ी है, जबकि 74.61 प्रतिशत श्रम भूमिहीन परिवारों की महिलाओं से लिया जाता है। 18 प्रतिशत से कम महिलाओं को नकद मजदूरी मिलती है। करीब 50 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया और 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं, जबकि केवल 16 प्रतिशत परिवारों के पास स्वास्थ्य बीमा है। रिपोर्ट में महिलाओं के नाम भूमि पंजीकरण, समान कार्य के लिए समान मजदूरी, मनरेगा में प्राथमिकता, खेतमजदूर कार्ड के माध्यम से DBT, प्रधानमंत्री आवास योजना व जल जीवन मिशन में प्राथमिकता और विशेष ऋण सुविधा की मांग की गई।

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