आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए भाषण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे के बीच भारत की सियासत गरमा गई है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दोनों मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। महुआ ने जहां न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी की तारीफ की, वहीं मोहन भागवत से भारत में राजनीतिक और सामाजिक विरोध के मामलों को लेकर सवाल भी पूछे।
महुआ मोइत्रा ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मोहन भागवत को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भागवत न्यूयॉर्क में अपनी बात इसलिए रख पाए क्योंकि जोहरान मामदानी का मानना था कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करना उनका काम नहीं है।
इसके बाद महुआ ने सवाल उठाया कि जब मोहन भागवत भारत वापस आएंगे तो क्या वह अपने समर्थकों को भी यही सीख देंगे, ताकि फिल्मों, शो और दूसरे कार्यक्रमों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं न हों। अपने पोस्ट में महुआ ने 'भगवा गुंडों' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक विवाद को और तीखा कर दिया।
महुआ मोइत्रा यहीं नहीं रुकीं। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत की विदेश यात्राओं को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा कि खाड़ी देशों में मुसलमानों को गले लगाते मोदी हों या न्यूयॉर्क शहर में इंसानियत का उपदेश देते भागवत भारत और विदेशों के लिए 'भगवा आचार संहिता' अलग और विशिष्ट है।
महुआ के इस बयान को बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा पर सीधे हमले के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने विदेश में दिए जा रहे संदेश और भारत में होने वाली राजनीतिक-सामाजिक घटनाओं के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल उठाया।
महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में पूछा 'मोदी जी का अगला विदेश दौरा कहां है?'
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर कारोबारी हित भी जुड़े हुए हैं। महुआ ने उज्बेकिस्तान में ग्रीन पावर और मिनरल माइनिंग इन्वेस्टमेंट से जुड़े कारोबारी संपर्कों का जिक्र किया और इसी आधार पर सरकार पर तंज कसा।
हालांकि, महुआ की पोस्ट में लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर सरकार या बीजेपी की ओर से इस वक्त कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दरअसल, पिछले कुछ समय में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राएं और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सार्वजनिक बयान लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। भागवत का न्यूयॉर्क में संबोधन और मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा इसी कड़ी में अब विपक्ष के निशाने पर है।
महुआ मोइत्रा ने दोनों घटनाओं को जोड़ते हुए सवाल खड़ा किया है कि विदेश में भारत की छवि और देश के भीतर राजनीतिक-सामाजिक व्यवहार में कितना अंतर है।
अब देखना होगा कि महुआ मोइत्रा के इन बयानों पर बीजेपी और आरएसएस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद से लेकर सोशल मीडिया तक बड़ा राजनीतिक विवाद बनता है।