यूपीआई, यानी देश में डिजिटल पेमेंट की सबसे बड़ी पहचान। चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, QR कोड स्कैन कर पेमेंट करना अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन अब 2 हजार रुपये से ज्यादा के कुछ यूपीआई पेमेंट पर लगने वाले MDR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा... हालांकि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को यूपीआई चार्ज से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एडवोकेट अंजन दत्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और NPCI से जवाब मांगा। याचिका में 2 हजार रुपये से ज्यादा के चुनिंदा यूपीआई पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि 2 हजार रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने केंद्र और अन्य पक्षों को चार हफ्ते में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि मामला कानूनी से ज्यादा तकनीकी प्रकृति का है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए MDR फ्रेमवर्क पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। यानी मामले की अगली सुनवाई तक प्रस्तावित व्यवस्था पर रोक नहीं लगी है। नए नियम के तहत 2 हजार रुपये से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR तय किया गया है। 75 हजार रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल... क्या इसका सीधा असर यूपीआई से पेमेंट करने वाले आम लोगों की जेब पर पड़ेगा? सरकार का कहना है- नहीं। पर्सन-टू-पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला यूपीआई ट्रांजैक्शन किसी भी रकम का हो, वह मुफ्त रहेगा। इसी तरह 2 हजार रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे कारोबारियों के ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
सरकार यह भी साफ कर चुकी है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और न ही इसे सरकार या NPCI वसूल करेगा। यह शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट एप्लीकेशन प्रोवाइडर्स समेत संबंधित पक्षों के बीच वितरित होगा। सरकार का तर्क है कि इससे यूपीआई के इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, इनोवेशन और ग्राहक सेवा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। वहीं यूपीआई ऐप्स को प्लेटफॉर्म फीस या किसी छिपे हुए चार्ज के जरिए ग्राहक से पैसा लेने की अनुमति नहीं होगी। कुछ जरूरी सेक्टरों के लिए अलग व्यवस्था भी तय की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2 हजार रुपये से ज्यादा के पात्र ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR रखा गया है।
यानी फिलहाल तस्वीर ये है कि यूपीआई इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहक के लिए तत्काल कोई सीधा ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं है, लेकिन बड़े मर्चेंट पेमेंट के इकोसिस्टम में MDR की नई व्यवस्था आने वाली है। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र, RBI और NPCI अपना पक्ष रखेंगे। अदालत के अगले कदम से यह साफ होगा कि इस नई व्यवस्था को लेकर उठाई गई कानूनी चुनौतियों पर आगे क्या रुख रहता है।