दिल्ली-NCR में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए आयोग ने 5 नवंबर से 20 नवंबर तक पूरे दिल्ली-NCR में धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल को कम करना और क्षेत्र की हवा को और अधिक प्रदूषित होने से बचाना है। आयोग का यह आदेश सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की निर्माण परियोजनाओं पर लागू होगा। इसके साथ ही दिल्ली समेत NCR के पांच जिलों में सरकारी और निजी कार्यालयों को 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने तथा शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने का निर्देश दिया गया है।
CAQM के आदेश के अनुसार, 5 नवंबर से 20 नवंबर तक ऐसी सभी निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिनसे बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है। इस प्रतिबंध के दायरे में सामान्य निर्माण कार्यों के अलावा सड़क निर्माण, हाईवे, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने, पाइपलाइन निर्माण और टेलीकम्युनिकेशन से संबंधित कार्यों पर भी प्रतिबंध लागू रहेगा। इसका मतलब है कि अब केवल निजी बिल्डिंग और आवासीय परियोजनाओं को ही नहीं, बल्कि कई सरकारी निर्माण परियोजनाओं को भी निर्धारित अवधि तक अपने धूल पैदा करने वाले कार्य बंद रखने होंगे। आयोग का मानना है कि निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है, इसलिए इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी है।
हालांकि, CAQM ने इस आदेश में कुछ जरूरी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को राहत भी दी है। आयोग के मुताबिक, रेलवे, मेट्रो सेवाओं, एयरपोर्ट और इंटर स्टेट बस टर्मिनल से संबंधित निर्माण कार्यों को प्रतिबंध से छूट दी गई है। इसके अलावा अस्पतालों के निर्माण, जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक परियोजनाओं को भी इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया है। इन परियोजनाओं को छूट देने का उद्देश्य जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं और बुनियादी सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना है।
वहीं, कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति और बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का निर्देश भी प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे कार्यालयों तक आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे सड़कों पर वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा। कुल मिलाकर, CAQM का यह फैसला दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि इन प्रतिबंधों और निर्देशों का जमीन पर कितना प्रभाव पड़ता है और आने वाले दिनों में दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता में कितना सुधार देखने को मिलता है।