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सितंबर से सरकार ने बदला चीनी बिक्री का नियम, आम लोगों को मिलेगी सस्ती चीनी?

Mon, 31 Aug 2026 06:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

पिछले करीब 15 दिनों से देश में चीनी की कीमतें लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जून के बाद से चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसके बाद बाजार में इसकी सप्लाई को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगने लगीं। अब रक्षाबंधन का त्योहार गुजर चुका है और लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी और क्या आगामी त्योहारों के दौरान बाजार में इसकी पर्याप्त आपूर्ति बनी रहेगी। कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने भी स्थिति पर नजर बढ़ाई और चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक तथा उत्पादन की स्थिति का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया। इसके बाद सरकार की ओर से पखवाड़ेवार कोटा प्रणाली लागू की गई, जिसका उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।

रक्षाबंधन से पहले ही चीनी बाजार से राहत के संकेत मिलने शुरू हो गए थे। मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। अब इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने की उम्मीद है। बीते सोमवार को इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान संगठन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने मिलों में चीनी के दाम घटने की जानकारी दी और अनुमान जताया कि इसका असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि करीब एक सप्ताह के भीतर उपभोक्ताओं को भी चीनी की कीमतों में राहत मिलनी शुरू हो सकती है।

अब सरकार की ओर से जारी आंकड़े भी इस अनुमान की पुष्टि करते नजर आ रहे हैं। PIB के मुताबिक, चीनी की खुदरा कीमतों में कमी की शुरुआत हो चुकी है। दो दिन पहले देश में चीनी के औसत खुदरा भाव में करीब 73 पैसे प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद औसत कीमत घटकर 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी को देखते हुए यह गिरावट अभी शुरुआती राहत ही मानी जा रही है। उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत तभी महसूस होगी, जब यह गिरावट लगातार जारी रहे और बाजार में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त बनी रहे।

आने वाले दिनों में गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे कई बड़े त्योहार हैं, जिनके दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी की खपत भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ने की संभावना रहती है। सरकार की पखवाड़ेवार कोटा व्यवस्था और मिलों के स्टॉक के सत्यापन का उद्देश्य इसी बढ़ी हुई मांग के दौरान बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट खुदरा बाजार तक लगातार पहुंचती है और आपूर्ति भी सामान्य रहती है, तो आने वाले त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं को चीनी के दाम में कुछ और राहत मिल सकती है। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा आने वाले दिनों में सप्लाई, मांग और सरकार के नियामक कदमों पर निर्भर करेगी।

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