दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए ऐसा सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार किया गया है, जिसका असर राजधानी की रफ्तार से लेकर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पर पड़ रहा है। कहीं सड़कों पर बैरिकेडिंग है, कहीं मेट्रो स्टेशनों पर ताले लगे हैं, तो कहीं ट्रेनों के पहिए थम गए हैं। स्कूल-कॉलेजों की पढ़ाई और परीक्षाओं पर भी इसका असर पड़ा है। आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले एक प्रदर्शन से पहले दिल्ली में इतनी सख्ती क्यों की गई है?
दरअसल, शनिवार, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कॉकroach जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगने वाली सीमाओं पर बैरिकेडिंग की गई है। गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पानीपत की ओर से आने वाले रास्तों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। कई जगहों पर वाहनों की जांच और आवाजाही पर नियंत्रण रखा जा रहा है। पुलिस ड्रोन कैमरों के जरिए भी निगरानी करने की तैयारी में है।
जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 37 स्थानों पर नाकाबंदी और 15 हिरासत केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 221 कंपनियां उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि दिल्ली पुलिस के जवान भी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनॉट प्लेस के बाजार, दुकानों, कार्यालयों और रेस्तरां पर भी असर पड़ने की बात कही गई है।
सुरक्षा इंतजामों का सबसे बड़ा असर रेल और मेट्रो यात्रियों पर पड़ा है। उत्तर रेलवे ने 10 अक्टूबर को करीब 250 ट्रेनों को रद्द करने की जानकारी दी है। इनमें लगभग 170 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा नौ ट्रेनों का परिचालन आंशिक रूप से किया जाएगा। इनका संचालन दिल्ली के बजाय गाजियाबाद तक सीमित रखा जा सकता है।
दिल्ली, गाजियाबाद, पलवल, पानीपत, रोहतक, रेवाड़ी, सहारनपुर, अलीगढ़ और शामली सहित कई रूट प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और मुंबई की ओर से आने वाली कुछ लंबी दूरी की ट्रेनें भी रद्द की गई हैं। मुंबई से दिल्ली आने वाली राजधानी एक्सप्रेस की कुछ सेवाओं को पांच घंटे पुनर्निर्धारित किया गया है।
वहीं, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जनपथ, बाराखंभा रोड, पटेल चौक और राजीव चौक समेत 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की जानकारी दी है। इससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ सकते हैं। यात्रियों को घर से निकलने से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन नंबर 139 से ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
सुरक्षा प्रतिबंधों का असर शिक्षा संस्थानों पर भी देखने को मिल रहा है। कुछ स्कूलों ने शनिवार को ऑनलाइन कक्षाएं चलाने का फैसला किया है, जबकि कई गतिविधियां रद्द कर दी गई हैं। भारती विद्यापीठ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने मध्यावधि परीक्षाएं स्थगित करने का निर्णय लिया है। कुछ संस्थानों ने अभिभावक-शिक्षक बैठक और खेल गतिविधियों के कार्यक्रमों में भी बदलाव किया है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित समय से काफी देर से मिला था। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर ऐसे कार्यक्रमों के लिए सामान्यतः कम से कम दस दिन पहले आवेदन देना जरूरी है। पिछले प्रदर्शनों के दौरान नियमों के उल्लंघन और आम लोगों को होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार किया गया है। नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 भी लागू होने की बात कही गई है।
उधर, इंडियन यूथ कांग्रेस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को सोमवार को सुनने की बात कही।
अब सवाल यह है कि सीजेपी का प्रस्तावित प्रदर्शन राजधानी में कितना असर डालता है और सुरक्षा के इन कड़े इंतजामों के बीच आम लोगों की आवाजाही कितनी प्रभावित होती है। फिलहाल, दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है और यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले परिवहन सेवाओं की ताजा स्थिति जरूर जांच लें।