श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से चायल में आयोजित सत्संग में नंगली साहिब से पहुंचीं नीता बाई ने श्रद्धालुओं को संत संगति, भजन और प्रेम की महिमा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में प्रथम संगति संतों की करनी चाहिए। केवल एक सत्संग में आने से जीवन नहीं बदलता, बल्कि सत्संग की बातों को जीवन में उतारना आवश्यक है। बाई ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में चार बातों को अपनाना बहुत जरूरी है। इनमें सुनना, समझना, मनन करना और उसे अपने आचरण में उतारना शामिल है। उन्होंने कहा कि जब ज्ञानी की संगति ज्ञानी से होती है तो जीवन की दिशा बदलने लगती है, लेकिन संत का मिलन हो जाए तो मनुष्य की वाणी और विचार पवित्र होने लगते हैं। सत्संग के दौरान बाई ने श्रद्धालुओं को अनेक प्रेरक प्रसंग सुनाए और कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे विचारों, भक्ति और सदाचार को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों की संगति मनुष्य को सही मार्ग दिखाती है और उसे प्रभु के करीब ले जाती है।