नाहन शहर के चौगान खेल मैदान में लगातार हो रहे मेलों और उनमें लग रही व्यावसायिक दुकानों ने अब सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मैदान का इस्तेमाल खेल गतिविधियों के लिए होना चाहिए, वहां बार-बार मेले और बाजार सजाए जाने से खेल प्रेमियों के साथ स्थानीय दुकानदार भी नाराज हैं। दुकानदारों का कहना है कि बाजार में पहले ही कारोबार कमजोर है और ऐसे आयोजनों में बाहर से आने वाले कारोबारी उनकी बची-खुची बिक्री भी अपने साथ ले जा रहे हैं। चौगान में कपड़े और कॉस्मेटिक समेत अलग-अलग सामान की दुकानें लगने से आसपास के स्थायी कारोबारियों में असंतोष है। उनका तर्क है कि नगर परिषद को मैदान से आय अर्जित करने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि ऐसे आयोजनों का स्थानीय कारोबार पर क्या असर पड़ रहा है। कॉस्मेटिक कारोबारी शिवम मित्तल ने कहा कि मेरी दुकान का सारा काम चौपट हो चुका है। बाजार में ग्राहक ही नहीं है। सारे लोग मेलों में जा रहे हैं। यहां साल में कई-कई मेले 10-10 दिन के लिए लग रहे हैं। दो-दो लोगों को दुकान में रोजगार भी दे रखा है। खेल प्रेमी तमन्ना ठाकुर ने कहा कि मेलों के कारण न तो खेल हो पा रहे हैं और न ही जो युवा ग्राउंड की तैयारी कर रहे हैं। वह भी नहीं हो पा रही है, जबकि यह एकमात्र खेल मैदान है। कारोबारी दिलप्रीत अरोड़ा ने कहा कि मेले के बाद खेल मैदान पूरी तरह से तहस नहस हो जाता है। जब मेले लगते हैं तो बाजार ठप हो जाता है। साल में एक-आध मेला हो ठीक है, लेकिन पूरे साल मेले होने से बाजार तो खत्म ही हो रहा है। रेडीमेड कपड़ों के कारोबारी गोपिंद्र सिंह ने कहा कि मेलों के कारण दुकानदारी पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम हों इससे दिक्कत नहीं है। ट्रेड फेयर के नाम से दुकानें लगाई जा रही हैं। इससे दुकानदारी प्रभावित हो रही है। फास्ट फूड कारोबारी सुरेंद्र बिस्ट ने कहा कि जबसे मेला लगा है तबसे दुकान ठप पड़ी है। मोटे किराये पर दुकानें मिली हुई हैं, कर्मचारी अलग से काम कर रहे हैं।