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रामपुर बुशहर: किसान सभा ने रामपुर में निकाली महारैली, किसानों-बागवानों के मुद्दों पर उठाई आवाज

हिमाचल किसान सभा के 17वें राज्य सम्मेलन का शुभारंभ मंगलवार को रामपुर बुशहर में महारैली और आम सभा के साथ हुआ। किसान मजदूर भवन चाटी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में किसानों, बागवानों और मेहनतकश जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। रैली और आम सभा को अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा और राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने संबोधित किया। सम्मेलन में कृषि से जुड़ी चुनौतियों, बढ़ती महंगाई, ग्रामीण रोजगार, दूध उत्पादकों को भुगतान और बिजली व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। उनके अनुसार, कृषि में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों और अन्य लागतों के महंगे होने से उत्पादन खर्च बढ़ रहा है, जबकि किसानों की आय पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने खाद्य वस्तुओं, चीनी, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर आम लोगों के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों पर भी पड़ रहा है। सभा में मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी किए जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार के अवसरों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। राकेश सिंघा ने हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादकों को भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दूध की कीमत का भुगतान दो-दो महीने बाद किया जा रहा है। उनके अनुसार, समय पर भुगतान नहीं होने से दूध उत्पादकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सम्मेलन में बिजली क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। किसान सभा के वक्ताओं ने आशंका जताई कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बिजली व्यवस्था से जुड़े फैसलों और उनके आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। दो दिवसीय सम्मेलन में किसानों, बागवानों, ग्रामीण रोजगार और मेहनतकश जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। सम्मेलन के माध्यम से किसान सभा ने इन समस्याओं को सार्वजनिक मंच पर उठाते हुए उनके समाधान की मांग की।

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