लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यरत मल्टी टॉस्क वर्करों ने सरकार से नियमितीकरण के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग उठाई है। मंडी जिला के मल्टी टॉस्क वर्करों ने अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजकर नियुक्ति की तिथि से सभी वित्तीय और सेवा लाभ देने की मांग की है। एमटीडब्ल्यू-पीडब्ल्यूडी यूनियन जिला मंडी के उपाध्यक्ष रामकृष्ण ने कहा कि प्रदेशभर में करीब 4,832 मल्टी टॉस्क वर्कर लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये कर्मचारी विभागीय कार्यों के साथ आपदा के दौरान सड़कों को बहाल करने में भी दिन-रात योगदान देते हैं। यूनियन के अनुसार, इसके बावजूद वर्करों को केवल छह हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। रामकृष्ण ने कहा कि इतनी कम राशि में परिवार का गुजारा करना मुश्किल है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए जल्द नीति बनाई जाए। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि नियमितीकरण की नीति बनाते समय कर्मचारियों की वरिष्ठता और नियुक्ति की तिथि को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी वित्तीय और सेवा लाभ नियुक्ति की तिथि से दिए जाएं, ताकि लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे वर्करों को राहत मिल सके। यूनियन के मीडिया प्रभारी हेमराज ने कहा कि ड्यूटी के दौरान जिन मल्टी टॉस्क वर्करों की मृत्यु हुई, उनके परिवारों को भी उचित सहायता नहीं मिली है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे परिवारों के सदस्यों को करुणामूलक आधार पर रोजगार दिया जाए। हेमराज ने कहा कि सरकार जब भी मल्टी टॉस्क वर्करों के प्रतिनिधियों से मिलती है, उन्हें केवल आश्वासन मिलता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और अब सरकार को नियमितीकरण के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। यूनियन ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मल्टी टॉस्क वर्करों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण की नीति बनने से उन्हें सेवा सुरक्षा और आर्थिक राहत मिल सकेगी।