फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंडी: कच्चे आशियाने से पक्के घर तक पहुंचा 16 एकल नारियों का सपना

Ankesh Dogra Updated Sun, 06 Sep 2026 12:33 PM IST

पति का साया उठने के बाद बच्चों की परवरिश और घर चलाने की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहीं मंडी जिले की 16 एकल नारियों के लिए सरकारी आवास योजना उम्मीद की नई किरण बनी है। वर्षों से कच्चे मकानों में गुजर-बसर कर रहीं इन महिलाओं के सिर पर अब पक्की छत का सपना साकार होने लगा है। मुख्यमंत्री विधवा, एकल, निराश्रित, दिव्यांग महिला आवास योजना के तहत जिले में 16 महिलाओं के मकान निर्माण के लिए तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की गई है। इन महिलाओं में कई ऐसी हैं, जिन्होंने पति की मौत के बाद खेती-बाड़ी, मनरेगा और दूसरे छोटे-मोटे काम कर बच्चों का पालन-पोषण किया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने लिए पक्का घर बनाना उनके लिए अब तक संभव नहीं हो पाया था। सरकारी सहायता मिलने के बाद किसी के घर की नींव मजबूत हो रही है तो किसी के आशियाने पर स्लैब डल चुका है। पधर तहसील के सियूंह गांव की पदमा देवी ने वर्ष 2007 में पति को खो दिया था। इसके बाद उन्होंने खेती-बाड़ी और मनरेगा में काम कर बच्चों की जिम्मेदारी संभाली। परिवार का पालन-पोषण करते हुए खुद के लिए पक्का मकान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। ऐसे में वर्षों तक परिवार ने कच्चे मकान में ही जिंदगी गुजारी। अब सरकारी योजना से मिली आर्थिक सहायता ने पदमा देवी की मुश्किल आसान कर दी है। उन्हें मकान निर्माण के लिए तीन लाख रुपये की सहायता मंजूर हुई है। इसकी दो किस्तें मिल चुकी हैं और घर का स्लैब भी तैयार हो चुका है। तीसरी किस्त मिलने के बाद मकान का बाकी काम पूरा होने की उम्मीद है। सुराहन गांव की कुसमा देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनके पति का वर्ष 2024 में निधन हो गया था। पति की मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए वह मनरेगा में काम करती हैं। कच्चे मकान में रह रहे परिवार को बारिश के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी होती थी। टपकती छत और कमजोर ढांचे के बीच बच्चों के साथ रहना किसी चुनौती से कम नहीं था। योजना के तहत कुसमा देवी को भी तीन लाख रुपये की सहायता मंजूर हुई है। दो किस्तें मिलने के बाद उनके मकान का स्लैब तैयार हो चुका है। अब परिवार को जल्द पक्के घर में रहने की उम्मीद है। मंडी जिले में इस योजना के तहत कुल 16 महिलाओं के मामले स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से चार महिलाओं को मकान निर्माण की दो-दो किस्तें मिल चुकी हैं। वहीं, 12 महिलाओं को 15 अगस्त को पहली किस्त जारी की गई है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विधवा, एकल, निराश्रित और दिव्यांग महिलाओं को आवास की सुविधा उपलब्ध करवाना है, ताकि उन्हें कच्चे और असुरक्षित मकानों में रहने के लिए मजबूर न होना पड़े। योजना के तहत पात्र महिलाओं को मकान निर्माण के लिए तीन लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है। इसके लिए पात्रता में मनरेगा में 100 दिन का काम पूरा करना भी शामिल है। सहायता राशि हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से उपलब्ध करवाई जा रही है। सरकारी सहायता से इन महिलाओं के लिए महज मकान का निर्माण नहीं हो रहा, बल्कि उनके परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार भी मिल रहा है। वर्षों से कच्ची छत के नीचे रहने वाली महिलाओं के लिए पक्का घर आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ आत्मसम्मान से जुड़ा सपना भी है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें