सरकार ने कारोबार को सुगम बनाने के उद्देश्य से दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे खुले रखने की छूट दी है। सरकार के इस फैसले पर हमीरपुर के कारोबारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। स्थानीय दुकानदारों सतीश सूद, राजेश आदि का कहना है कि इस छूट से छोटे व्यापारियों को कोई खास फायदा नहीं पहुंचने वाला है। उनका तर्क है कि अधिकतर छोटी दुकानों में या तो एक कर्मचारी काम करता है या फिर व्यापारी खुद ही दुकान संभालता है। व्यापारियों के अनुसार, सीमित कर्मचारियों के बलबूते किसी दुकान को 24 घंटे संचालित करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करना अपने आप में एक अतिरिक्त खर्च होगा। दुकानदारों का कहना है कि 24 घंटे दुकान खोलने की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर छोटा व्यापारी अपनी दुकान पूरे दिन और रात खुली रख पाएगा। स्थानीय कारोबारियों ने बाजार की मौजूदा स्थिति का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि दिन के समय ही ग्राहकों की संख्या कम रहती है। ऐसे में रात के समय दुकानें खुली रखने का कोई ठोस औचित्य नजर नहीं आता। उनके मुताबिक, रात में दुकान खोलने से बिजली और अन्य परिचालन खर्च बढ़ सकता है, जबकि बिक्री बढ़ने की कोई गारंटी नहीं है। इसलिए छोटे व्यापारियों के लिए 24 घंटे कारोबार करना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं हो सकता। वहीं, व्यापार मंडल हमीरपुर के प्रधान सुमित ठाकुर ने कहा कि सरकार के इस निर्णय का मुख्य लाभ बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल, सुपरमार्केट और बड़ी कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स को मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़े प्रतिष्ठानों के पास अधिक कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध होते हैं, जबकि छोटे दुकानदार सीमित संसाधनों के साथ कारोबार करते हैं। सरकार के फैसले के बाद अब हमीरपुर के बाजार में कारोबारियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि 24 घंटे दुकानें खोलने की छूट का वास्तविक लाभ किस तरह के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अधिक मिलेगा।