मेला ग्राउंड दाड़ी में आयोजित रामलीला के दूसरे दिन मंगलवार को श्रीराम जन्म, श्रवण शिकार और माता सीता के जन्म का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों ने श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति और राजा दशरथ से अनजाने में हुए श्रवण वध के प्रसंग को बेहद भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया। इस मार्मिक दृश्य ने रामलीला देखने पहुंचे दर्शकों की आंखें नम कर दीं। मंचन के दौरान श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर जा रहे थे। इसी बीच राजा दशरथ से अनजाने में शिकार करते समय श्रवण कुमार का वध हो गया। घायल श्रवण ने राजा दशरथ से अपने माता-पिता की प्यास बुझाने के लिए पानी पहुंचाने का आग्रह किया। जब राजा दशरथ ने श्रवण के अंधे माता-पिता को उनके पुत्र की मृत्यु का दुखद समाचार सुनाया, तो वे गहरे शोक में डूब गए। पुत्र वियोग से व्याकुल माता-पिता ने राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग सहने का श्राप दिया और अपने प्राण त्याग दिए। कलाकारों ने इस प्रसंग को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत कर दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद रामलीला में अयोध्या में प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म के मनमोहक दृश्य दिखाए गए। साथ ही धरती से माता सीता के प्रकट होने और ताड़का वध के प्रसंग का भी आकर्षक मंचन किया गया। रामलीला के इन दृश्यों के माध्यम से कलाकारों ने भक्ति, माता-पिता के प्रति समर्पण और धर्म की स्थापना जैसे संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।