राजकीय प्राथमिक पाठशाला कुलाल में विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व और इसके संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। विद्यालय के शिक्षक सुरेंद्र शर्मा ने शून्य कालांश में रोचक गतिविधि के माध्यम से बच्चों को ओजोन परत की भूमिका समझाई। गतिविधि के दौरान ग्लोब को पृथ्वी का प्रतीक मानकर उसके ऊपर छाता लगाया गया। शिक्षक ने बच्चों को बताया कि जिस प्रकार छाता हमें सूर्य की तेज धूप से बचाता है, उसी तरह ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी यानी यूवी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है। इस सरल और रोचक गतिविधि से विद्यार्थियों को ओजोन परत का महत्व आसानी से समझने में मदद मिली। शिक्षक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस के रूप में घोषित किया है। यह दिवस वर्ष 1987 में हुए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की याद में मनाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ओजोन की मात्रा मापने की इकाई डॉबसन के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को ओजोन परत के संरक्षण के लिए जरूरी सावधानियों के बारे में बताया गया। उन्हें पुराने रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और कुछ स्प्रे से निकलने वाली ओजोन-क्षयकारी गैसों के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा छोटी दूरी तय करने के लिए पैदल चलने या साइकिल का इस्तेमाल करने का संदेश दिया गया। शिक्षकों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की आदतें बचपन से विकसित की जाएं तो आने वाली पीढ़ियां पृथ्वी को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम में शिक्षक लोचू राम, केहर सिंह और बीएड प्रशिक्षु शिक्षिका अंजलि भी मौजूद रहीं।