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चंबा: चुवाड़ी में गूंजे नाग विनतरू महाराज के जयकारे, नंगे पांव लेने पहुंचे श्रद्धालु; नाग मंढौर जातर मेले का आगाज

चुवाड़ी क्षेत्र के लोगों की आस्था के प्रमुख केंद्र नाग मंढौर जातर मेले का आगाज हो गया है। रविवार शाम करीब पांच बजे प्रिययुगल स्थित नाग विनतरू मंदिर से नाग विनतरू महाराज के गुर साजो-सामान के साथ कुठेहड़ स्थित नाग मंढौर मंदिर के लिए रवाना हुए। देवता के आगमन को लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। नाग विनतरू महाराज को लेने के लिए चुवाड़ी क्षेत्र के लोग बड़ी श्रद्धा के साथ नंगे पांव प्रिययुगल पहुंचे। इनमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल रहे। देवता के प्रति लोगों की गहरी आस्था का यह दृश्य पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। जैसे ही नाग विनतरू महाराज प्रिययुग कस्बे से होकर आगे बढ़े, पूरा कस्बा नाग महाराज के जयघोष से गूंज उठा। स्थानीय लोगों ने धूप डालकर देवता का स्वागत किया और उनका आशीर्वाद लिया। परंपरा के अनुसार नाग विनतरू महाराज प्रिययुगल से होकर वनेट, चूडाणा, लाहड़ और लगा होते हुए कुठेहड़ पहुंचते हैं। इसके बाद कुठेहड़ स्थित नाग मंढौर मंदिर में दोनों भाइयों के मिलन की परंपरा निभाई जाती है। क्षेत्र में आयोजित होने वाली इन जातरों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व काफी अधिक है। नाग मंढौर मंदिर कुठेहड़ में इस वर्ष की यह तीसरी जातर बताई जा रही है। क्षेत्र में कुल आठ जातर मेले आयोजित होते हैं। इन मेलों में आसपास के विभिन्न गांवों से श्रद्धालु पहुंचकर नाग महाराज के समक्ष शीश नवाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। जातर के दौरान नाग महाराज के गुर क्षेत्र के मौसम और लोगों की मनोकामनाओं से जुड़े विषयों को लेकर भविष्यवाणियां भी करते हैं। यही परंपरा इन मेलों को क्षेत्र के लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है। कुड़णू पंचायत के प्रधान रजनीश और वार्ड सदस्य प्रदीप ठाकुर ने बताया कि नाग मंढौर महाराज की पहली जातर का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ था। जातर मेले को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नाग मंढौर जातर के दौरान क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है और विभिन्न गांवों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। देव परंपरा से जुड़े इन आयोजनों में स्थानीय लोगों की भागीदारी चुवाड़ी क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक विरासत को आज भी जीवंत बनाए हुए है।

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