श्री गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ पुत्र बाबा श्रीचंद जी महाराज का 532वां प्रकाशोत्सव चंबा स्थित प्राचीन मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रकाशोत्सव में चंबा के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेका और सुख-शांति की कामना की। प्रकाशोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर पूरे दिन धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहा। भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के बीच श्रद्धालु बाबा श्रीचंद जी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचते रहे। मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही सुबह से लेकर दिनभर बनी रही। प्रकाशोत्सव के आयोजन को लेकर करीब एक माह पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। इसके साथ ही दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। बाबा श्रीचंद जी को उदासीन परंपरा के प्रमुख संतों में माना जाता है। चंबा में उनसे जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। मान्यता के अनुसार बाबा श्रीचंद जी ने चंबा की धरती पर भी चरण रखे थे। स्थानीय मान्यता के अनुसार उस समय चंबा में साधु-संतों के प्रवेश पर रोक थी और बाबा श्रीचंद जी को रावी नदी के पार ही रोक दिया गया था। इसके बाद उन्होंने एक शिला को नदी पार ले जाने का आदेश दिया। मान्यता है कि वह शिला बाबा श्रीचंद जी को लेकर रावी नदी के पार पहुंची और चंबा नगर के तीन चक्कर लगाने के बाद वर्तमान मंदिर स्थल पर आकर रुक गई। आज भी इस पवित्र शिला को श्रद्धालु आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में पूजते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा श्रीचंद जी इसी शिला से अंतर्ध्यान हुए थे। प्रकाशोत्सव के दिन मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर दिनभर भक्तिमय बना रहा।